पद्यपंकज Uncategorized आओ वृक्षारोपण करके पर्यावरण बचाये- रामकिशोर पाठक

आओ वृक्षारोपण करके पर्यावरण बचाये- रामकिशोर पाठक


Ram Kishore Pathak

आओ! वृक्षारोपण करके, पर्यावरण बचायें – सार छंद गीत

धरा श्यामली कुंठित रहती, मिलकर उसे हसायें।
आओ! वृक्षारोपण करके, पर्यावरण बचायें।।

तरुवर हमने जमकर काटे, धरती हुई विरानी।
हरी-भरी धरती की केवल, सुनते अभी कहानी।।
पुनः धरा पर वृक्ष लगाकर, हरियाली लौटायें।
आओ! वृक्षारोपण करके, पर्यावरण बचायें।।०१।।

आग उगलने वाली गर्मी, तन सबका झुलसाती।
हाय! प्राण अब निकल न जाए, बरबस मुख में आती।।
ढूँढ-ढूँढकर छाँव तलाशें, चैन जहाँ हम पायें।
आओ! वृक्षारोपण करके, पर्यावरण बचायें।।०२।।

ऋतुएँ भी परिवर्तित अब तो, बेमौसम सब होता।
फसल हमारी मारी जाती, विवश कृषक है रोता।।
हुई प्रकृति क्रोधित अब हमसे, चलो आज समझायें।
आओ! वृक्षारोपण करके, पर्यावरण बचायें।।०३।‌।

हम विकास में अंधे होकर, नियम प्रकृति का भूलें।
मनमानी इतनी कर बैठे, जिससे चुभती शूलें।।
वृक्ष लगाकर शंकर जैसा, हम हाला पी जायें।
आओ! वृक्षारोपण करके, पर्यावरण बचायें।।०४।।

कंद-मूल समिधा जिससे है, पर्ण पुष्प जो देती।
प्राण वायु को शुद्ध करे जो, हर विकार हर लेती।।
तरुवर सच्चे मित्र हमारे, इनको गले लगायें।
आओ! वृक्षारोपण करके, पर्यावरण बचायें।।०५।।

मेघों को आकर्षित करके, वर्षा जल को लाते।
प्रकृति संतुलित तरुवर रखते, जन-जीवन मुस्काते।।
हरा-भरा हो चमन हमारा, जिससे हम हर्षायें।
आओ! वृक्षारोपण करके, पर्यावरण बचायें।‌।०६।।

झेल रहें जो आज समस्या, तरु निदान उसका है।
ऐसे जो हालात हुए हैं, दोष बता किसका है।।
खूब लगाना वृक्ष हमें है, हम संकल्प उठायें।
आओ! वृक्षारोपण करके, पर्यावरण बचायें।।०७।।

गीतकार:- राम किशोर पाठक
प्रधान शिक्षक
सियारामपुर, पालीगंज, पटना, बिहार।
संपर्क – ९८३५२३२९७८

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