पद्यपंकज Uncategorized किताबें – रुचिका

किताबें – रुचिका



किताबें
दर्द में मरहम सी,
तन्हाई में सच्ची साथी,
खुशियों में साथ रहकर
ये अपने होने का एहसास कराती।
किताबें न जाने
कितने ही अनसुलझे प्रश्नों का हल लेकर आती।

किताबें दुनिया भर की सैर कराती,
नए नए लोगों से मिलवाती
नए स्वाद,नए रहन-सहन का बतलाकर
कहीं भी अनजाना नही रहने देती
किताबें न जाने
कितने ही अनजानों से परिचय करवाती।

इतिहास, भूगोल की सारी बातें
खगोलीय घटना जो दिन में होती या
फिर हो जाती रातें
सबके बारें में बतलाकर
किताबें ज्ञान विज्ञान का अनुसरण कर
जीवन को नई राह दिखाती।

किताबों से दूर रहकर
जो जीना सीखे हैं
मानो वह बिन प्रियतम के
खत प्रेम का लिखे हैं।
किताबें स्वयं का स्वयं से मेल कराती।

रूचिका
राजकीय प्राथमिक विद्यालय कुरमौली गुठनी सिवान बिहार

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