तुम्हें देखकर अंकुरित प्रणय- गीत
तुम्हें देखकर अंकुरित प्रणय।
होता स्पंदित है नित्य निलय।।
यौवन अंगराई आज अजब।
फैलाई जुल्फें झटक गजब।।
आओ कर लें अहसास विलय।
तुम्हें देखकर अंकुरित प्रणय।।०१।।
ले मंद-मंद मुस्कान अधर।
कातिल है चंचल शोख नजर।।
हिय में लाती है आज प्रलय।
तुम्हें देखकर अंकुरित प्रणय।।०२।।
लेकर पलकों का बोझ नयन।
छुपा रही कोई भाव गहन।।
आकर्षित करती है गेसु मलय।
तुम्हें देखकर अंकुरित प्रणय।।०३।।
गीतकार:- राम किशोर पाठक
प्रधान शिक्षक
सियारामपुर, पालीगंज, पटना, बिहार।
संपर्क – ९८३५२३२९७८

