नयन कटारी- मानस छंद गीत वर्णिक
१११-१२२, २११-११२
नयन कटारी, यौवन तन के।
विकल निगोड़ी, पायल खनके।।
मृदुल लता सी, मोहक लगती।
अधर अनोखी, प्रेमिल ठगती।।
सरस सुधा सी, आसव निकले।
विहँस हमेशा, अंतस कुचले।।
सघन घटा सी, अंजन बनके।
नयन कटारी, यौवन तन के।।०१।।
बनकर रंभा, नर्तन करती।
रति बन जैसे, संयम हरती।।
नजर लड़े जो, शोख शहर से।
प्रणय बुलावा, भेज नजर से।।
पलक झुकाती, रैन गगन के।
नयन कटारी, यौवन तन के।।०२।।
हृदय विनोदी, चंचल जिनका।
उदित हुआ है, संचल तिनका।।
भटक गए वे, तृष्ण नजर में।
अटक गए वे, बीच भँवर में।।
सुध-बुध खोये, संबल मन के।
नयन कटारी, यौवन तन के।।०३।।
गीतकार:- राम किशोर पाठक
प्रधान शिक्षक
सियारामपुर, पालीगंज, पटना, बिहार।
संपर्क – ९८३५२३२९७८

