आपका ब्राउज़र Text-to-Speech सपोर्ट नहीं करता।
विधा-मुक्तक आ-सार छंद
विषय-छुट्टियाँ
अब तो ढिग में जून महीना,सूरज है गरमाया,
छुट्टी भी हो गई हमारी,वक्त करो मत जाया।
पास तुम्हारे मैं सोऊँगा,शिशु दादू से बोला…,
सुबह साथ उठ जाना लेकर,सबल बनेगी काया।।
बाग-बगीचे की हरियाली, पुस्तक में है अच्छी,
या चलकर देखें लेखक ने,बात लिखी है सच्ची।
पोता ने दादू से कहकर,खाते-खाते सोया…,
सुबह उठा दादू से बोला,पगडंडी है कच्ची ?।।
उत्सुकता में घटी दूरियाँ,दिखने लगे टिकोले,
पहले मिलना कोयल से जो,डाली-डाली डोले।
बाद गिलहरी से भी मिलना,चिक-चिक जिसकी बोली..,
झुंड तितलियों से मिलना जो,दिल में मिश्री घोले।।
किस्म-किस्म के फूल खिले हैं,उनसे तो मिलवाओ,
भीनी-भीनी खुशबू वाली,निकट मोगरा जाओ।
महक रात-रानी चंपा अरु,गुल गुलाब मम मोहे…,
चमक चमेली जूही से भी, परिचय तो करवाओ।
हाथ पकड़ कर बच्चों ने जो,कहा हो गई पूरी,
बाधक बनकर खड़ी नहीं है,कोई भी मजबूरी।
आओ मिलकर सैर करा दें,जितना तुम चाहोगे…,
पर इतना तो ध्यान करो जी,आतप से रख दूरी।।
रामपाल प्रसाद सिंह ‘अनजान’
अवकाश प्राप्त शिक्षक
मध्य विद्यालय दरवे-भदौर

