पद्यपंकज Uncategorized खेल खेल में- रुचिका

खेल खेल में- रुचिका



खेल खेल में

खेल खेल में उसने सीखा जिंदगी के गुण,
हार जीत में नही बदलो जीवन के धुन,
स्वस्थ प्रतिस्पर्धा रखो एक दूजे संग
ईर्ष्या नही रखो बात लो यह तुम सुन।

जाति-पांति का भेद भूलाकर खेलो तुम
अमीर हो या गरीब सबको ले लो तुम
मन में नही कोई पूर्वाग्रह कभी पालो,
भाईचारे का भाव अपना लो तुम।

खेल खेल में हर मुश्किल का हल करो,
समस्या कोई भी हो तुम कभी नही डरो,
समस्या को कभी भी बड़ा मत बनाओ,
बेवजह किसी झगड़े में तुम नही पड़ो।

खेल खेल में जिसने जीवन का समझा मर्म,
नही कभी गलत हुए उसके कोई भी कर्म,
ईमानदारी विश्वास सच्चाई को अपनाया
उनके लिए वही रहा सबसे बड़ा धर्म।

रूचिका
प्रधान शिक्षक
राजकीय प्राथमिक विद्यालय कुरमौली गुठनी सिवान बिहार

0 Likes
Spread the love

Leave a Reply