कमल नयन से राधा कहती- राधा रमण छंद गीत
१११-१११-२२२-११२
कमल नयन से राधा कहती।
निसदिन उर में पीड़ा रहती।।
हर-पल मुरली छेड़ा करते।
दिनभर वनिता डेरा धरते।।
अनबन सखियों की मैं सहती।
कमल नयन से राधा कहती।।०१।।
कुछ पल अपना दे दो मुझको।
निज कर अपने ले लो मुझको।।
प्रिय हिय सरिता धारा बहती।
कमल नयन से राधा कहती।।०२।।
सुध-बुध सहसा दामोदर लो।
गिरिधर अब बाँहों में भर लो।।
मधुरस अधरों से मैं गहती।
कमल नयन से राधा कहती।।०३।।
गीतकार:- राम किशोर पाठक
प्रधान शिक्षक
सियारामपुर, पालीगंज, पटना, बिहार।

