वाह रे इंसान – बैकुंठ बिहारी
दूसरों से छल कपट कर,
समझता तू खुद को बुद्धिमान,
वाह रे इंसानI
अपनों को परास्त कर,
खुद को समझता तू महान,
वाह रे इंसानI
स्वजनों का प्रेम भुला,
खुद को को समझता तू सामर्थ्यवान,
वाह रे इंसानI
ज्येष्ठ-गुरुजनों का सम्मान भुला,
खुद को समझता तू प्रतिष्ठावान,
वाह रे इंसानI
कृतज्ञ के विपरीत कृतघ्न बनने को,
समझता तू अपना कल्याण,
वाह रे इंसानI
प्रकृति से विद्रोह कर,
समझता तू खुद को बलवान,
वाह रे इंसानI
पर-पीड़ा को अपना आनंद बना,
समझता तू जगत कल्याण,
वाह रे इंसानII
बैकुंठ बिहारी
स्नातकोत्तर शिक्षक कम्प्यूटर विज्ञान
उच्चतर माध्यमिक विद्यालय सहोड़ा गद्दी कोशकीपुर

