पर्व दिवाली ज्योति का, करता तम का अंत। खुशियाँ बाँटें मिल सभी, कहते सब मुनि संत। कहती दीपों की अवलि, दूर करें अँधियार। दुख दीनों का दूर कर, लाएँ नव…
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स्वरचित कविता का प्रकाशन
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