धरा का गौरव – धर्मेंद्र कुमार ठाकुर इस धरा पर जनम लिया, ये सौभाग्य हमारा है, जिसकी गोदी में पला-बढ़ा,[...]
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अंतर्ब्रह्माण्ड का दिव्य दीप – धर्मेंद्र कुमार ठाकुरअंतर्ब्रह्माण्ड का दिव्य दीप – धर्मेंद्र कुमार ठाकुर
अंतर्ब्रह्माण्ड का दिव्य दीप – धर्मेंद्र कुमार ठाकुर नभ मंडल का दृश्य-जगत तो स्थूल दृष्टि का रेला है, किंतु पिंड[...]
वज्रतुंड – प्राकृतिक वरदान – धर्मेंद्र कुमार ठाकुरवज्रतुंड – प्राकृतिक वरदान – धर्मेंद्र कुमार ठाकुर
वज्रतुंड (प्राकृतिक वरदान) – धर्मेंद्र कुमार ठाकुर नभ की अनंत गहराइयों से, जो रखता धरती पर नज़र, कुदरत का अनुपम[...]
॥ नवदुर्गा स्तुति ॥ – धर्मेंद्र कुमार ठाकुर॥ नवदुर्गा स्तुति ॥ – धर्मेंद्र कुमार ठाकुर
॥ नवदुर्गा स्तुति ॥ – धर्मेंद्र कुमार ठाकुर प्रथम रूप शैलपुत्री माता, कष्ट निवारण करने आती, हिमालय की वो पावन[...]
क्रोध का कुनबा – धर्मेंद्र कुमार ठाकुरक्रोध का कुनबा – धर्मेंद्र कुमार ठाकुर
क्रोध का कुनबा – धर्मेंद्र कुमार ठाकुर भीतर हमारे बैठा है, एक ऐसा परिवार, जो सुख-चैन को डस लेता, कर[...]
पिघल गया अनुशासन – धर्मेंद्र कुमार ठाकुरपिघल गया अनुशासन – धर्मेंद्र कुमार ठाकुर
पिघल गया अनुशासन – धर्मेंद्र कुमार ठाकुर वक्त की धूप में देखो, कैसे विचार बदल जाते हैं, जो कल तक[...]
चेतना का शंखनाद – धर्मेंद्र कुमार ठाकुरचेतना का शंखनाद – धर्मेंद्र कुमार ठाकुर
चेतना का शंखनाद – धर्मेंद्र कुमार ठाकुर क्यों आवश्यकता आन पड़ी, इस बालिका दिवस को मनाने की? ये जान लेना[...]
अदृश्य शत्रु – धर्मेंद्र कुमार ठाकुरअदृश्य शत्रु – धर्मेंद्र कुमार ठाकुर
अदृश्य शत्रु – धर्मेंद्र कुमार ठाकुर मूर्छित ब्रह्मांड पड़ा है देखो, जड़ता का साम्राज्य यहाँ है, जिसने पाला इस दानव[...]
स्वर-माला – धर्मेंद्र कुमार ठाकुरस्वर-माला – धर्मेंद्र कुमार ठाकुर
स्वर-माला – धर्मेंद्र कुमार ठाकुर अ से अः तक की सुंदर कविता आओ बच्चों, गाएं गाना, स्वरों का है रूप[...]
मूक वेदना और स्वर्ण मंडी-धर्मेंद्र कुमार ठाकुर मूक वेदना और स्वर्ण मंडी-धर्मेंद्र कुमार ठाकुर
मूक वेदना और स्वर्ण मंडी-धर्मेंद्र कुमार ठाकुर मौन खड़ी प्रकृति रोती है, अंबर से झरते आँसू, पवित्र लगन की वेदी[...]
