Tag: teacher

Dharmendra Kumar Thakur

कागज के फूल _ धर्मेंद्र कुमार ठाकुरकागज के फूल _ धर्मेंद्र कुमार ठाकुर

0 Comments 10:27 pm

कागज के फूल कागज़ के जो फूल हैं, सुंदर दिखते आज। खुशबू इनमें है नहीं, फीका सारा काज।। चेहरे पर[...]

और पढ़ेंऔर पढ़ें
Dharmendra Kumar Thakur

धुंध और सूरज”धर्मेंद्र कुमार ठाकुरधुंध और सूरज”धर्मेंद्र कुमार ठाकुर

0 Comments 10:21 pm

“धुंध और सूरज” मन की थकी परछाईं है यह, केवल पल की तन्हाई। यह कोई स्थाई हार नहीं, मत मानो[...]

और पढ़ेंऔर पढ़ें
Nitu Rani

शहीद महाराणा प्रताप।_ नीतू रानीशहीद महाराणा प्रताप।_ नीतू रानी

0 Comments 10:16 pm

शहीद महाराणा प्रताप। विषय -वीर गाथा 6.0 शीर्षक -राणा प्रताप को पढ़ लेना। महाराणा प्रताप के पिता महाराणा उदय सिंह[...]

और पढ़ेंऔर पढ़ें
Dharmendra Kumar Thakur

सुहाग का पर्व: करवा चौथ_धर्मेंद्र कुमार ठाकुरसुहाग का पर्व: करवा चौथ_धर्मेंद्र कुमार ठाकुर

0 Comments 10:03 pm

सुहाग का पर्व: करवा चौथ व्रत करवा चौथ का पावन, प्रेम का यह पर्व महान, रखती हैं सुहागिनें देखो, पति[...]

और पढ़ेंऔर पढ़ें
Dharmendra Kumar Thakur

शीत ऋतु की दस्तक – धर्मेंद्र कुमार ठाकुरशीत ऋतु की दस्तक – धर्मेंद्र कुमार ठाकुर

0 Comments 8:31 pm

शीत ऋतु की दस्तक – धर्मेंद्र कुमार ठाकुर गुनगुनी धूप का मीठा साया, लो सर्दी का मौसम आया। दिन छोटे[...]

और पढ़ेंऔर पढ़ें
Dharmendra Kumar Thakur

‘वाणी-संवाद’ – धर्मेंद्र कुमार ठाकुर‘वाणी-संवाद’ – धर्मेंद्र कुमार ठाकुर

0 Comments 8:27 pm

‘वाणी-संवाद’ – धर्मेंद्र कुमार ठाकुर सम्’ उपसर्ग व ‘भाषण’ मिले, बने शब्द अनमोल। सम्यक सुंदर बातचीत, मिश्री जैसे बोल॥ दो[...]

और पढ़ेंऔर पढ़ें
Punam Kumari

मैं फलक – तू चाँद  मेरा – पुनम कुमारीमैं फलक – तू चाँद  मेरा – पुनम कुमारी

0 Comments 8:22 pm

मैं फलक – तू चाँद  मेरा – पुनम कुमारी मैं फलक हूँ, तू चाँद मेरा, तुझसे ही रोशन संसार मेरा।[...]

और पढ़ेंऔर पढ़ें
Subala Kumari

सद्भाव की दीपावली – सुबाला कुमारीसद्भाव की दीपावली – सुबाला कुमारी

0 Comments 8:15 pm

सद्भाव की दीपावली – सुबाला कुमारी सब मिलकर एक दीप जलाएं अपने अन्तर्मन की द्वेष मिटाए निर्बलों, असहायों को आस[...]

और पढ़ेंऔर पढ़ें
Subala Kumari

सब मिलकर एक दीप जलाएं – सुबाला कुमारीसब मिलकर एक दीप जलाएं – सुबाला कुमारी

0 Comments 8:11 pm

सब मिलकर एक दीप जलाएं – सुबाला कुमारी खेतों ने ओढ़ ली है धानी चादर भूमिपुत्र भी मंद मंद मुस्कुरा[...]

और पढ़ेंऔर पढ़ें