बोली बोला, तोल-तोल के – पुनम कुमारी बोली बोला तोल-तोल के, बात कहऽ दिल खोल-खोल के। मीठ बोल से मन[...]
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शिक्षक हूँ मैं : शिष्य के भविष्य का शिल्पकार — उमेश कुमार सिन्हाशिक्षक हूँ मैं : शिष्य के भविष्य का शिल्पकार — उमेश कुमार सिन्हा
शिक्षक हूँ मैं : शिष्य के भविष्य का शिल्पकार — उमेश कुमार सिन्हा शिक्षक हूँ मैं, शिक्षा से मेरा अटूट[...]
पथ अपना अपना – धर्मेन्द्र कुमार ठाकुरपथ अपना अपना – धर्मेन्द्र कुमार ठाकुर
पथ अपना अपना – धर्मेन्द्र कुमार ठाकुर जीवन के इस महासमर में, कोटि-कोटि राही चलते हैं, सबके अपने-अपने पथ हैं,[...]
वर्णमाला बोध काव्य – धर्मेन्द्र कुमार ठाकुरवर्णमाला बोध काव्य – धर्मेन्द्र कुमार ठाकुर
वर्णमाला-बोध काव्य- धर्मेन्द्र कुमार ठाकुर कमल ‘क’ से विकसित हो मन में, पढ़ो निरंतर पल-पल तुम, खिसके जब खरगोश ‘ख’[...]
भिक्षुक – धर्मेन्द्र कुमार ठाकुरभिक्षुक – धर्मेन्द्र कुमार ठाकुर
भिक्षुक – धर्मेन्द्र कुमार ठाकुर कहते हैं लोग यहाँ अब न कोई दरिद्र रहा, सबकी तिजोरी भर गई, कोई न[...]
हृदय की पुकार- कुमारी प्रियंका वर्माहृदय की पुकार- कुमारी प्रियंका वर्मा
हां समझो मुझको इसके पहले कि भाव शून्य ना बन जाऊ,, नित जीवन के संघर्षों से , हां अंतर्मन के[...]
बच्चों तुम फूल मेरे, बागवान के — पुनम कुमारीबच्चों तुम फूल मेरे, बागवान के — पुनम कुमारी
बच्चों तुम फूल मेरे, बागवान के — पुनम कुमारी बच्चों, तुम फूल मेरे, विद्यालय बागवा, तुमसे ही महके सदा, मेरा[...]
भूख की हुंकार – धर्मेंद्र कुमार ठाकुरभूख की हुंकार – धर्मेंद्र कुमार ठाकुर
भूख की हुंकार भूख उदर में जब आती है, रणचंडी-सा रूप दिखाती है, धमनियों में लहू उबलता है, नस-नस में[...]
कर्त्तव्य बोध – धर्मेंद्र कुमार ठाकुरकर्त्तव्य बोध – धर्मेंद्र कुमार ठाकुर
कर्त्तव्य बोध अधिकार जताने से पहले कर्त्तव्य हमें समझाना होगा, अमृत रस पाने से पहले विष का प्याला पीना होगा।[...]
शब्द-बाण और ब्रह्मांड का कम्पन- धर्मेंद्र कुमार ठाकुरशब्द-बाण और ब्रह्मांड का कम्पन- धर्मेंद्र कुमार ठाकुर
शब्द-बाण और ब्रह्मांड का कम्पन वाणी वह अनमोल रतन है, जो चाहे तो सृष्टि संवार दे, पर ज़रा सी चूक[...]
