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नारी को अधिकार दो, सम्मान दो! – कार्तिक कुमार
नारी की आवाज़ – समानता का शंखनाद
रचनाकार एवं प्रस्तुति : कार्तिक कुमार
क्यों रोकी जाती है नारी, जब वह आगे बढ़ती है,
क्यों उसकी प्रतिभा समाज की दीवारों से लड़ती है?
पढ़-लिखकर जब वह ज्ञान का दीप जलाने आती है,
क्यों पुरुष प्रधान व्यवस्था उसके पंख काट जाती है?
यज्ञ करने का अधिकार है, तो यज्ञ उसे करने दो,
ज्ञान और वेदों की धारा में, स्वतंत्र उसे बहने दो।
जब मंत्रों का अर्थ समझती, जब विधि-विधान जानती है,
फिर क्यों उसकी योग्यता पर बंदिश लगाई जाती है?
उपदेश देने का अधिकार है, तो उपदेश भी वह देगी,
ज्ञान की गंगा लेकर वह भी, समाज को दिशा देगी।
क्यों महिला को महिला से उपदेश दिलाने में संकोच है?
क्या ज्ञान किसी एक लिंग की जागीर, क्या यही सोच है?
जिसने वेदों को समझा है, वह वेदों की बात करेगी,
जिसने सत्य को जाना है, वह सत्य की सौगात करेगी।
गार्गी, मैत्रेयी की धरती पर यह कैसा व्यवहार है?
नारी को रोकने वालों! यह कैसा संस्कार है?
नारी केवल घर की शोभा या परिवार की पहचान नहीं,
वह ज्ञान, शक्ति, साधना है, कोई साधारण इंसान नहीं।
वह भी यज्ञ की ऋचाएँ पढ़े, वह भी प्रवचन कर सकती है,
अपने तप और ज्ञान के बल पर, दुनिया बदल सकती है।
धर्म किसी का बंधुआ नहीं, ज्ञान किसी की जागीर नहीं,
ईश्वर की बनाई नारी, पुरुष से कुछ कम नहीं।
जहाँ नारी का मान नहीं, वहाँ धर्म अधूरा रहता है,
जहाँ समान अधिकार नहीं, वहाँ समाज पिछड़ा रहता है।
अब समय आ गया है, अपनी सोच बदलनी होगी,
नारी की प्रतिभा को भी उचित जगह देनी होगी।
यज्ञशाला हो या प्रवचन मंच, सबके लिए समान हो,
नारी-पुरुष दोनों का सम्मान, समाज का अभिमान हो।
नारी को अवसर दीजिए, वह इतिहास रच देगी,
ज्ञान और संस्कारों से नई पीढ़ी गढ़ देगी।
रोकिए मत उसके कदम, उसे आकाश में उड़ने दो,
नारी को अधिकार दो, सम्मान दो, आगे बढ़ने दो!
नारी का सम्मान ही, मानवता का सम्मान है,
समान अधिकार और अवसर ही, सच्चे धर्म की पहचान है।
✍️ प्रस्तुति एवं रचनाकार
अध्यक्ष जिला योग संघ मुजफ्फरपुर
बिहार पंचायत क्लब रजिस्ट्रेशन प्राप्त
कार्तिक कुमार
मध्य विद्यालय कटरमाला गोरौल वैशाली 7004318121
योग शिक्षक एवं सामाजिक चिंतक

