वर्तमान में मां का नव रूप:- पुरुषोत्तम कुमार आज भी माता का नव रूप समाज में है विद्यमान स्त्री[...]
Tag: @TOB
चेहरों का मेला(भ्रम):-धर्मेंद्र कुमार ठाकुर चेहरों का मेला(भ्रम):-धर्मेंद्र कुमार ठाकुर
चेहरों का मेला(भ्रम):-धर्मेंद्र कुमार ठाकुर घृणा नहीं है किसी से, न कोई शिकायत है, बस इस स्वार्थी संसार की एक[...]
अभी उम्मीद बाकी है- उमेश कुमार सिन्हा ‘अभी उम्मीद बाकी है- उमेश कुमार सिन्हा ‘
अभी उम्मीद बाकी है- उमेश कुमार सिन्हा ‘निर्देशक ‘ हर कहानी का अंत कहाँ, कुछ पन्ने शेष भी रहते हैं,[...]
रस-वृक्ष (काव्य रूप) :- धर्मेन्द्र कुमार ठाकुररस-वृक्ष (काव्य रूप) :- धर्मेन्द्र कुमार ठाकुर
रस-वृक्ष (काव्य रूप) :- धर्मेन्द्र कुमार ठाकुर हृदय-भूमि पर उगा हुआ है, एक अनूठा रस का वृक्ष, काव्य-जगत का गौरव[...]
छंद-शास्त्र का सार:- धर्मेन्द्र कुमार ठाकुर छंद-शास्त्र का सार:- धर्मेन्द्र कुमार ठाकुर
छंद-शास्त्र का सार:- धर्मेन्द्र कुमार ठाकुर यहाँ मेरे द्वारा दी गई छंद शास्त्र की जानकारी को सरल, लयबद्ध और गेय[...]
मौन और अनुभव :- धर्मेन्द्र कुमार ठाकुरमौन और अनुभव :- धर्मेन्द्र कुमार ठाकुर
मौन और अनुभव :- धर्मेन्द्र कुमार ठाकुर चलो अब जाने भी दो क्या करोगे कथा सुनकर, ये चोट जो गहरी[...]
हम है कर्जदार – धर्मेंद्र कुमार ठाकुरहम है कर्जदार – धर्मेंद्र कुमार ठाकुर
हम है कर्जदार – धर्मेंद्र कुमार ठाकुर हम है कर्जदार हाँ, हम कर्जदार हैं… गुनाहगार नहीं, बस जिम्मेदारियों के बीमार[...]
नए–नए वृक्ष लगाना है – धीरज कुमारनए–नए वृक्ष लगाना है – धीरज कुमार
नए –नए वृक्ष लगाना है – धीरज कुमार मानव जीवन हमने पाया, बुद्धि का मिला खज़ाना है, तो वसुधा को[...]
कुष्माण्डेति चतुर्थकम् “_अरविंद मिश्र “नीरज “कुष्माण्डेति चतुर्थकम् “_अरविंद मिश्र “नीरज “
“कुष्माण्डेति चतुर्थकम् ” रविसम दीप्त देह केर आभा, दुर्गा अष्ट भुजा बाली। इषित हाससँ सृजित केलहुँ ब्रह्मांड सकल पुनि प्रतिपाली।[...]
मरती संवेदनाएं _ रानी कुमारीमरती संवेदनाएं _ रानी कुमारी
शीर्षक – मरती संवेदनाएं आज इस समाज के भागमभाग में कैसी अजब दीवार बैठी है? संवेदनाएं मर गई कुरीति और[...]
