पद्यपंकज Bhakti कृष्ण एक बार फिर आओ

कृष्ण एक बार फिर आओ



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कृष्ण एक बार फिर धरा पर आओ,
सुदामा से जो मित्रता तुमने की थी,
उस मित्रता का राज सबको समझाओ।
कृष्ण तुम जरूर आओ
मित्रता धर्म निभाने का गुर सिखाओ।

कृष्ण एक बार फिर धरा पर आओ,
ढाई आखर प्रेम के तुम हमें समझाओ
राधा के संग जो तुम्हारा प्रेम था,
उस प्रेम का मूल मंत्र हमें बताओ।
काम वासना में डूब रहे मन को
पवित्र निःस्वार्थ प्रेम का मर्म तुम सिखाओ।

कृष्ण एक बार फिर धरा पर आओ,
गीता उपदेश देकर कर्मयोगी हमें बनाओ।
कर्म ही सच्ची साधना है
ये भूल चुके हैं जो भी लोग
और कर्म के संग फल की इच्छा करते लोगों को
निष्काम कर्म का मर्म तुम बतलाओ।

कृष्ण एक बार फिर धरा पर आओ,
अपने भक्तों के सारथी बनकर
जीवन डगर में उचित राह दिखाओ।
कृष्ण तुम जरूर धरा पर आओ
अपनी राह भूल चुके भटके लोगों को
सही रास्ता तुम दिखाओ
और जीवन के होने का सार्थक उद्देश्य समझाओ।

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रूचिका

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