गिराओगे गटर ईमान



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गिराओगे गटर ईमान

2122 2122 212
सब बचाओगे अगर शैतान को ।
तब गिराओगे गटर ईमान को ।

जातियों में जब बॅंटेंगे नागरिक
खेल समझेंगे वही मतदान को ।

उस महामारी बचाया था जिसे
आंकते हैं कम हमारी जान को ।

कैद पंछी, औरतें ससुराल में
झेल जाते हर सितम बलवान को ।

डाल सुविधा देश की चिंता करो
छोड़ पाकिस्तान या जापान को ।

खोखले का काम जब जाते निकल
भूल जाते सादगी सम्मान को ।

सो रहे हैं, खा रहे हैं, पी रहे
लाज कैसी ‘लाल’-सा मेहमान को ।
—————-लाल बच्चन पासवान,

प्रधानाध्यापक, उ म वि मधुबनी, मीनापुर, मुजफ्फरपुर ।

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Lal Bachchan Paswan

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