पहली कक्षा के बच्चे,
दिखते भोले- भाले,
होते मन के सच्चे ।
पहली कक्षा के बच्चे,
पहली कक्षा के बच्चे ।
पहली बार जब कक्षा में आता,
रो-रो कर दुखड़ा सुनाता,
कभी सुनाता पेट में दर्द,
कभी दिखाता दांत में दर्द।
घर जाने के खातिर,
तरह-तरह के बहाने बनाता,
बहाने नहीं चलता देख,
मैडम जी से रूठ जाता ।
पहली बार जब स्लेट पर लिखता,
दुनिया का नक्शा है, दिखता ।
पेंसिल पकड़ता ऐसे जैसे,
दादा जी का छड़ी है लगता ।
धीरे-धीरे कक्षा उसको,
लगने लगता अच्छे-अच्छे,
पहली कक्षा के बच्चे,
दिखते भोले- भाले,
होते मन के सच्चे,
पहली कक्षा के बच्चे ।
लेखक -शिक्षक संतोष कुमार ,
प्राथमिक विद्यालय बेदौल गोट,
प्रखंड- पुपरी, जिला- सीतामढ़ी ।
Santosh Kumar


