परोपकार – बेबी अर्चना
परपीर से जब द्रवित न हो हिय
वो मानव संवेदनहीन कहलाए
परमार्थ ही है धन अनमोल
प्रकृति प्रदत्त हर चीज बताए
तार, तरू, नदी, पर्वत और झरने
परोपकार के होते निर्मल स्रोत
स्वार्थरहित करते परहित सेवा
सदा जलाते दिव्य एक ज्योत
सुख-वैभव, ऐश्वर्य, प्रतिष्ठा
ये सब तो है क्षणिक संसार
साथ हमेशा कर्म ही चलता
और किए गये पर उपकार
सरल प्रेम भाव रखना सीखो
इनसे ही चलता है संसार
जीवन सहज निभाते जाओ
मिट जाएगा क्लेश विकार
बेबी अर्चना
मध्य विद्यालय कुआड़ी
प्रखंडकुर्साकांटा जिला अररिया

