Author: Anupama Priyadarshini

Jainendra

बेबस इंसान – जैनेन्द्र प्रसाद रवि’बेबस इंसान – जैनेन्द्र प्रसाद रवि’

0 Comments 6:32 pm

रूप घनाक्षरी छंद पानी हेतु किसानों की नजरें तरस रहीं, धूल उड़े सावन में देख रहे आसमान। नमी बिना खेतों[...]

और पढ़ेंऔर पढ़ें
Nitu Rani

तिरंगा – नीतू रानीतिरंगा – नीतू रानी

0 Comments 6:30 pm

तीन रंग का मेरा झंडा कितना सुन्दर प्यारा है, इसको वीर सपूतों ने मिलकर इसे संवारा है। देखो ऊपर लहर[...]

और पढ़ेंऔर पढ़ें
Jainendra

बरखा बहार – जैनेन्द्र प्रसाद रवि’बरखा बहार – जैनेन्द्र प्रसाद रवि’

0 Comments 1:21 pm

बरखा बहार आई मन में उमंग छाई, मोती जैसे आसमान झमाझम बरसे। नई – नई दूब उगी, फसल की आस[...]

और पढ़ेंऔर पढ़ें
Jainendra

प्रकृति के आगे लाचार – जैनेन्द्र प्रसाद रवि’प्रकृति के आगे लाचार – जैनेन्द्र प्रसाद रवि’

0 Comments 9:02 am

छंद -रूप घनाक्षरी अचानक मौसम ने बदला है करवट, आज सारे जीव जंतु गर्मी से गए हैं हार। पसीने से[...]

और पढ़ेंऔर पढ़ें
Devkant

दोहा – देव कांत मिश्र ‘दिव्य’दोहा – देव कांत मिश्र ‘दिव्य’

0 Comments 9:44 pm

दीप जलाकर ज्ञान का, करिए गुरु का गान। चरण शरण रहकर सदा, तजिए निज अभिमान।। गुरुवर प्रतिदिन शिष्य को, देते[...]

और पढ़ेंऔर पढ़ें
Nitu Rani

जन्मदिन गीत – नीतू रानीजन्मदिन गीत – नीतू रानी

0 Comments 9:43 pm

नाना नाती का मना जन्मदिन, बड़ी धूमधाम से। जन्मदिन के दिन सत्संग भजन हुआ, संतों का मिला आशीष संतों के[...]

और पढ़ेंऔर पढ़ें
Devkant

फूल – देव कांत मिश्र ‘दिव्य’फूल – देव कांत मिश्र ‘दिव्य’

0 Comments 9:41 pm

लगते कितने पुष्प अभिराम गहरा चिंतन कर लो मानव। फूलों-सा नित बनिए ललाम करो नष्ट मत बनकर दानव।। फूल प्रकृति[...]

और पढ़ेंऔर पढ़ें
Devkant

श्रावण- देव कांत मिश्र ‘दिव्य’श्रावण- देव कांत मिश्र ‘दिव्य’

0 Comments 9:38 pm

शुचि मन-भावन श्रावण आया आगत को लख हों पुलकित मन। अम्बर बादल चहुँदिशि छाया। दृश्य मनोहर बरसा-सावन।। कृषक मुदित मन[...]

और पढ़ेंऔर पढ़ें
Jainendra

फलों का राजा आम – जैनेन्द्र प्रसाद रवि’फलों का राजा आम – जैनेन्द्र प्रसाद रवि’

0 Comments 9:36 pm

आम का मौसम आया, स्वादिष्ट सौगात लाया, सुन्दर रसीले और भाव-सुर लहरी। कोई खाए आम्रपाली, केशर किशुन भोग, जर्दालु केसर[...]

और पढ़ेंऔर पढ़ें