मन में सोच-विचार कर, करिए नव संकल्प। जीवन में सद्भावना, कभी नहीं हो अल्प। दान-पुण्य की भावना, हो जीवन[...]
Category: छंद
दोहावली – देवकांत मिश्र ‘दिव्य’दोहावली – देवकांत मिश्र ‘दिव्य’
रखें शिष्य के शीश पर, गुरु आशिष का हाथ। तिमिर सर्वदा दूर हों, पथ आलोकित साथ।। विद्यालय है ज्ञान का,[...]
छठ- महिमा – रत्ना प्रियाछठ- महिमा – रत्ना प्रिया
सुर संस्कृत में छठ-महिमा, सब मुक्त कंठ से गाते हैं। तब सविता के प्रखर प्राण को, आत्मसात् कर पाते हैं।।[...]
दोहावली – देव कांत मिश्र ‘दिव्य’दोहावली – देव कांत मिश्र ‘दिव्य’
पर्व दिवाली ज्योति का, करता तम का अंत। खुशियाँ बाँटें मिल सभी, कहते सब मुनि संत। कहती दीपों की अवलि,[...]
दोहावली – रामपाल सिंह ‘अनजान’दोहावली – रामपाल सिंह ‘अनजान’
प्रात काल वो सूर्य को, करती प्रथम प्रणाम। सूर्य देव आशीष दें, रहे सुहाग ललाम।। प्रातकाल से है लगी, सजा[...]
विधाता छंद – एस. के. पूनमविधाता छंद – एस. के. पूनम
दरस देतीं प्रथम माता, कहाँ हो तुम चली आतीं। क्षुधा प्यासा ललन बैठा, पके दाना तुम्हीं लातीं। दया कर के[...]
शरद पूर्णिमा- रामकिशोर पाठकशरद पूर्णिमा- रामकिशोर पाठक
पूनम की रात शीतल चाँदनी फैलाए अंतिम रात्रि आश्विन शरद पूर्णिमा कहलाए घर में माताएँ क्षीर खीर बनाए। पूनम[...]
शरद पूर्णिमा – रूचिकाशरद पूर्णिमा – रूचिका
शरद पूर्णिमा का सोलह कलाओं से परिपूर्ण होता चाँद। दूधिया रोशनी बिखेरता प्रेम चाँदनी संग दिलोंजान से करता। घटता[...]
मनहरण घनाक्षरी- जैनेन्द्र प्रसाद ‘रवि’मनहरण घनाक्षरी- जैनेन्द्र प्रसाद ‘रवि’
दिन भर काम करे, कभी न आराम करे, अकेली सुबह शाम, भोजन बनाती हो। हमें विद्यालय भेज, कपड़े बर्तन धोती,[...]
दोहावली- रामकिशोर पाठकदोहावली- रामकिशोर पाठक
अपने मन की कीजिए, रखकर मन में चाव। औरों की वो मानिए, जो हो सही सुझाव।। सत्य वचन हीं[...]
