आओ खेलें खेल,चलगी अब अपनी रेल पढ़ें और लिखेंगे, बनेंगे महान हमको भी तब जानेगा सारा जगत महान करते रहेंगे[...]
Category: बालपन की कविताओं का संकलन
बिहार अपनी समृद्ध सांस्कृतिक और भाषाई विविधता के लिए जाना जाता है। यहाँ की लोकभाषाएँ—
भोजपुरी, वज्जिका, मगही, मैथिली, अंगिका, बज्जिका, कुरमाली, खोरठा, पंचपरगनिया आदि—न केवल हमारी पहचान हैं, बल्कि हमारी परंपराओं, भावनाओं और जीवन शैली की जीवंत अभिव्यक्ति भी हैं।
इन्हीं लोकभाषाओं को संरक्षित और समृद्ध करने के उद्देश्य से NCERT द्वारा बाल साहित्य (विशेषकर बाल कविताओं) के संकलन की एक महत्वपूर्ण पहल की जा रही है, जिसमें Teachers of Bihar सक्रिय भूमिका निभा रहा है।
शिक्षक बनना आसान नहीं शिक्षक बनना आसान नहीं
शिक्षक बनना आसान नहीं खुद को तरासना पड़ता है नन्हें हीरे को तरासने के लिए….. थके हुए बदन[...]
लट्टूवा के नाचलट्टूवा के नाच
लट्टूवा के नाच (बाल कविता) लट्टूवा घुम-घुम घूमेला, धरती पर रंग बनावे। ना थकाला, ना रुक जाला, सबके मनवा बहलावे।[...]
Wo bihar wala bachpanWo bihar wala bachpan
वो बिहार वाला बचपन पीपल की छइयाँ, बगिया की वो क्यारी, वो अमरुद तोड़ना, वो मज़ेदारी। याद आता है वो[...]
