Category: Bhawna

Girindra Mohan Jha

पुत्री दिवस- गिरिंद्र मोहन झापुत्री दिवस- गिरिंद्र मोहन झा

0 Comments 7:34 pm

आज अन्तरराष्ट्रीय पुत्री दिवस पर प्रस्तुत मेरी एक कविता:पुत्री-दिवसधन्य वह गेह है, जहँ खिलखिलाती बेटियाँ,धन्य वह गेह है, जहाँ चहचहाती[...]

और पढ़ेंऔर पढ़ें

भारत की बेटी -रिंकु कुमारीभारत की बेटी -रिंकु कुमारी

0 Comments 8:03 pm

मां हमें भारत की बेटी बनकर जीने दो रश्मों रिवाज की जंजीर तोड़कर आगे बढ़ने दो लाचार बनकर अब हमें[...]

और पढ़ेंऔर पढ़ें

मैं पिता बन गया हूँ – बिंदु अग्रवालमैं पिता बन गया हूँ – बिंदु अग्रवाल

0 Comments 7:59 pm

छोड़ दी हैं मैंने सारी अठखेलियाँ  क्योंकि अब मैं पिता बन गया हूँ। अब मैं पिता को नखरे नहीं दिखाता,[...]

और पढ़ेंऔर पढ़ें
Girindra Mohan Jha

वृद्धावस्था – गिरिंद्र मोहन झावृद्धावस्था – गिरिंद्र मोहन झा

0 Comments 6:32 pm

शैशव, बाल्य, किशोर, युवा,से होकर तुम बने हो वृद्ध,तुम्हारा असली,बड़ा गुण है,हर स्थिति में स्थिर औ’ सिद्ध,ज्ञान, विज्ञान, अनुभव में[...]

और पढ़ेंऔर पढ़ें

माता की सवारी – जैनेन्द्र प्रसाद रविमाता की सवारी – जैनेन्द्र प्रसाद रवि

0 Comments 8:41 am

मनहरण घनाक्षरी छंद आश्विन पावन मास,नवरात्र होता खास,इस बार माता जी की, हाथी की सवारी है। श्रद्धा रख नर नारी-सामग्री[...]

और पढ़ेंऔर पढ़ें

ऐ जिन्दगी तेरे लिए – डॉ पूनम कुमारीऐ जिन्दगी तेरे लिए – डॉ पूनम कुमारी

0 Comments 11:00 pm

ए ज़िन्दगी तेरे लिए क्या क्या करना रह गया बाक़ी,बस इतना बता दे ज़िन्दगी बहुत भटक लिया गुमनामी मेंए जिंदगी[...]

और पढ़ेंऔर पढ़ें

शीतलता के बीच एक दोपहरी भटकी- रामपाल प्रसाद सिंह अनजानशीतलता के बीच एक दोपहरी भटकी- रामपाल प्रसाद सिंह अनजान

0 Comments 10:42 pm

शीतलता के बीच एक दोपहरी भटकी।रोला कैसा है लावण्य, रूपसी नाजुक नारी।कोमल पीपल पात,सरीखे डिगती डारी।।जो जाते उस राह,भनक लेते[...]

और पढ़ेंऔर पढ़ें

सरहद पे खड़े हैं जज्बा लेकर- बिंदु अग्रवालसरहद पे खड़े हैं जज्बा लेकर- बिंदु अग्रवाल

0 Comments 9:34 pm

सरहद पे खड़े हैं लेकर जज्बा बलिदान का सरहद पे खड़े हैं लेकर जज्बा बलिदान का।देश की आन पे करते[...]

और पढ़ेंऔर पढ़ें

पितृपक्ष के भाव- अमरनाथ त्रिवेदीपितृपक्ष के भाव- अमरनाथ त्रिवेदी

0 Comments 9:28 pm

पितृ पक्ष के भाव जिनमें  है पिता की भक्ति ,वही तो पितृ तर्पण करते ।अपने उर में श्रद्धा लेकर ,वही [...]

और पढ़ेंऔर पढ़ें