Category: padyapankaj

Through Padyapankaj, Teachers Of Bihar give you the chance to read and understand the poems and padya of Hindi literature. In addition, you can appreciate different tastes of poetry, including veer, Prem, Raudra, Karuna, etc.

आकृतियों का अनोखा खेल – धर्मेंद्र कुमार ठाकुर आकृतियों का अनोखा खेल – धर्मेंद्र कुमार ठाकुर 

0 Comments 6:55 pm

आकृतियों का अनोखा खेल – धर्मेंद्र कुमार ठाकुर    आओ बच्चों तुम्हें सिखाएं, आकृतियों की दुनिया घुमाएं। तरह-तरह के आकार[...]

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Purushottam Kumar

कार्तिक अमावस्या – पुरुषोत्तम कुमारकार्तिक अमावस्या – पुरुषोत्तम कुमार

0 Comments 10:01 pm

कार्तिक अमावस्या – पुरुषोत्तम कुमार आने वाली है, फिर काली अमावस्या रात, पर इस रात की अलग होगी बात। न[...]

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Dharmendra Kumar Thakur

अंधकार का शिल्पी – धर्मेंद्र कुमार ठाकुरअंधकार का शिल्पी – धर्मेंद्र कुमार ठाकुर

0 Comments 8:13 pm

अंधकार का शिल्पी – धर्मेंद्र कुमार ठाकुर जहाँ प्रकाश प्राण त्यागता है, वहाँ से हमारा युग आरम्भ होता है, सत्य[...]

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Dharmendra Kumar Thakur

भविष्य का भारत: संस्कारयुक्त राष्ट्रनिर्माण –  धर्मेंद्र कुमार ठाकुर भविष्य का भारत: संस्कारयुक्त राष्ट्रनिर्माण –  धर्मेंद्र कुमार ठाकुर 

0 Comments 8:09 pm

भविष्य का भारत: संस्कारयुक्त राष्ट्रनिर्माण –  धर्मेंद्र कुमार ठाकुर  केवल आधुनिकता की अंधी दौड़ में, शिक्षा अपनी दिशा खो रही[...]

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RAMPAL SINGH ANJAN

धरती से नाता टूटा है – रामपाल प्रसाद सिंह ‘अनजान’धरती से नाता टूटा है – रामपाल प्रसाद सिंह ‘अनजान’

0 Comments 7:46 pm

धरती से नाता टूटा है – रामपाल प्रसाद सिंह ‘अनजान’ शुभ दर्शन केवल कागज पर, धरती से नाता टूटा है।[...]

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Dharmendra Kumar Thakur

पाषाण में परमात्मा – धर्मेंद्र कुमार ठाकुरपाषाण में परमात्मा – धर्मेंद्र कुमार ठाकुर

0 Comments 7:42 pm

पाषाण में परमात्मा – धर्मेंद्र कुमार ठाकुर जब गोकुल पर मँडराया संकट, इंद्र का कोप अपार था, तब श्रीकृष्ण ने[...]

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Dharmendra Kumar Thakur

ध्वनि एक, अर्थ अनेक – धर्मेंद्र कुमार ठाकुरध्वनि एक, अर्थ अनेक – धर्मेंद्र कुमार ठाकुर

0 Comments 7:38 pm

ध्वनि एक, अर्थ अनेक – धर्मेंद्र कुमार ठाकुर सुनने और पढ़ने में जो, लगते एक समान। पर अर्थों की दृष्टि[...]

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Shivendra Prakash Suman

अपना मंच, अपना सम्मान – शिवेन्द्र प्रकाश सुमनअपना मंच, अपना सम्मान – शिवेन्द्र प्रकाश सुमन

0 Comments 7:32 pm

अपना मंच, अपना सम्मान – शिवेन्द्र प्रकाश सुमन दूजे मंच पर रचना छाए, चेहरे पर मुस्कान, अपने मंच पर छपे[...]

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Dharmendra Kumar Thakur

अविराम’ – धर्मेंद्र कुमार ठाकुरअविराम’ – धर्मेंद्र कुमार ठाकुर

0 Comments 9:23 pm

‘अविराम’ – धर्मेंद्र कुमार ठाकुर थक चुका है यह तन, पर सांस अभी विस्मित है, हर पग पर मिल रही,[...]

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