पगडंडी पर भागे ऐसे, बालक सुलभ सलोने हैं। नन्हीं-नन्हे साथ-साथ हैं, अनुभव नए पिरोने हैं। पगडंडी भी स्वागत करने, हरियाली[...]
Category: sandeshparak
Sandeshparak poems are poems that are used to convey a message with feelings. Through poems, statements related to the country, the world, and society are transmitted to the people. Teachers of Bihar give an important message through the Sandeshparak of Padyapankaj.
मुझको कान्हा आज बनाओ -राम किशोर पाठकमुझको कान्हा आज बनाओ -राम किशोर पाठक
अम्मा कुछ मुझको बतलाओ। मुझको कान्हा आज बनाओ। जो चाहूँ वह दे दो मुझको। ऐसे कभी नहीं तड़पाओ।। मैं भी[...]
बाल कविता – रामपाल प्रसाद सिंह ‘अनजान’बाल कविता – रामपाल प्रसाद सिंह ‘अनजान’
होकर मगन गगन के नीचे, दौड़ रहे ये बच्चे हैं। जिन्हें देखकर वयोवृद्ध सब,अंतर मन से नच्चे हैं।। हरियाली के[...]
काम का महत्व-जैनेन्द्र प्रसाद ‘रवि’काम का महत्व-जैनेन्द्र प्रसाद ‘रवि’
सीखाते कुरान-गीता, गुरुजन माता-पिता, हमें ये जीवन नहीं, मिला है आराम को। मजदूर किसानों को मिलता विश्राम नहीं, सुबह सबेरे[...]
लेखनी-एस.के.पूनमलेखनी-एस.के.पूनम
सोच रही है लेखनी, कहाँ से प्रारंभ करुँ, फँस गया विचारों में,हो न जाए परिहास। तूलिका भी डर रही, कागज[...]
शिक्षक – कहमुकरी राम किशोर पाठकशिक्षक – कहमुकरी राम किशोर पाठक
शिक्षक – कहमुकरी सबके हित को तत्पर रहता। अपने हक में कभी न कहता।। दोष गिनाते बने समीक्षक। क्या सखि?[...]
बिरसा मुंडा की जयंती-रामपाल प्रसाद सिंह ‘अनजान’बिरसा मुंडा की जयंती-रामपाल प्रसाद सिंह ‘अनजान’
आजादी आधार, मिली जब से भारत को। दौड़ पड़े सबलोग,विनत हुए सु-स्वागत को।। सुनकर विस्मित मान,रहे हैं खुद को प्राणी।[...]
रामपाल प्रसाद सिंह ‘अनजान’ रामपाल प्रसाद सिंह ‘अनजान’
बोल अरे क ख या ग घ,घोल मिठापन डाल रही है। बैठ गई जब सम्मुख माॅं तब,बालक ज्ञान प्रक्षाल रही[...]
सत्य की ज्योति- कार्तिक कुमारसत्य की ज्योति- कार्तिक कुमार
जब सब ओर अंधियारा छा जाए जब झूठ का शोर बढ़ जाए, जब लोग सत्य को मौन कर दें —[...]
तोटक छंद वर्णिक-रामपाल प्रसाद सिंहअनजानतोटक छंद वर्णिक-रामपाल प्रसाद सिंहअनजान
तोटक छंद वर्णिक(112) 112-112-112-112 दो चरण सम तुकांत दिन में दिखते मन के सपने। हिय में रहने लगते अपने।। रचने[...]
