Category: sandeshparak

Sandeshparak poems are poems that are used to convey a message with feelings. Through poems, statements related to the country, the world, and society are transmitted to the people. Teachers of Bihar give an important message through the Sandeshparak of Padyapankaj.

Jainendra

ठंड का प्रभाव-जैनेन्द्र प्रसाद ‘रवि’ठंड का प्रभाव-जैनेन्द्र प्रसाद ‘रवि’

0 Comments 1:32 pm

तापमान गिरने से मौसम बदलने से *धीरे-धीरे ठंडक का, बढ़ता प्रभाव है।* पंछियाँ तो घोसले में- रहतीं दुबककर, *पशु छिप[...]

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Ram Kishore Pathak

मैं राष्ट्र धर्म को अपनाया – राम किशोर पाठक मैं राष्ट्र धर्म को अपनाया – राम किशोर पाठक 

0 Comments 1:21 pm

मैं बहती बन जाऊँ सरिता  मैं जीवन में लाऊँ ललिता  मैं झुंड यहाँ देखूँ कितने मैं ढूँढ रहा खुद के[...]

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आसरा पास बैठी है – रामपाल प्रसाद सिंह ‘अनजान’ आसरा पास बैठी है – रामपाल प्रसाद सिंह ‘अनजान’ 

0 Comments 1:31 pm

  खींचती मर्म की रेखा।। जन्म लेते जिसे देखा। आज माॅं खास बैठी है। आसरा पास बैठी है।। दर्द होने[...]

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Ram Kishore Pathak

हमें नहीं डरना-राम किशोर पाठकहमें नहीं डरना-राम किशोर पाठक

0 Comments 1:35 pm

कभी नहीं रुकते, आगे है बढ़ना। सहज भाव कहते, हमें नहीं डरना।। आती है बाधा, अक्सर राहों में। ताकत कर[...]

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Girindra Mohan Jha

बचपन-गिरीन्द्र मोहन झाबचपन-गिरीन्द्र मोहन झा

0 Comments 11:09 pm

खेलना, मस्ती करना, बड़े-बड़े ख्वाब देखना, पढ़ाई करना, जिज्ञासु प्रवृत्ति का हो जाना, बड़े-बड़े सपने देखना, पर धरातल से सदा[...]

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Girindra Mohan Jha

संस्कार-गिरीन्द्र मोहन झासंस्कार-गिरीन्द्र मोहन झा

0 Comments 10:17 am

कहता हूं, व्यक्ति अपने संस्कार का ही होता है गुलाम, सुसंस्कारवश अच्छा काम करता, कुसंस्कार से बुरा काम, अच्छा संस्कार[...]

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Jainendra

प्रभाती पुष्प – जैनेन्द्र प्रसाद ‘रवि’प्रभाती पुष्प – जैनेन्द्र प्रसाद ‘रवि’

0 Comments 10:36 pm

श्याम वंशीवाला सिर पे मुकुट मोर, गोपियों के चित्तचोर, होंठ लाले-लाल किये, खड़ा बंसी वाला है। कहते हैं ग्वाल-बाल, मित्र[...]

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नशे में युवा पीढ़ी – बिंदु अग्रवालनशे में युवा पीढ़ी – बिंदु अग्रवाल

0 Comments 10:29 pm

नशे के गर्त में डूब रही है, आज की युवा पीढ़ी। कर्णधार कहलाते देश के, विकास की है जो सीढ़ी।[...]

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Ram Kishore Pathak

हे सखी! – पथिका छंद – राम किशोर पाठकहे सखी! – पथिका छंद – राम किशोर पाठक

0 Comments 10:23 pm

हे सखी! – पथिका छंद – राम किशोर पाठक हे सखी! मुझे बतलाओ। कैसे रहूँ बिना साजन के, बैठी घर[...]

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