ओ सब कुछ याद है। वो घर के छत के चूते हुए छप्पर-छानी याद हैं, वो सावन में रिमझिम बरसता[...]
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शीतलता के बीच एक दोपहरी भटकी- रामपाल प्रसाद सिंह अनजानशीतलता के बीच एक दोपहरी भटकी- रामपाल प्रसाद सिंह अनजान
शीतलता के बीच एक दोपहरी भटकी।रोला कैसा है लावण्य, रूपसी नाजुक नारी।कोमल पीपल पात,सरीखे डिगती डारी।।जो जाते उस राह,भनक लेते[...]
एक पेड़ मां के नाम- रवि कुमारएक पेड़ मां के नाम- रवि कुमार
आओ हम सब मिलकर करें, एक काम ।चलो लगाते हैं ”एक पेड़ माँ के नाम”।। छाँव देते इसके पत्ते, लगते[...]
Hindi divasHindi divas
हिन्दी दिवस : रसों की सरिता सुरेश कुमार गौरव हिन्दी का श्रृंगार है, जैसे फूलों की[...]
हिंदीहिंदी
विश्व हिंदी दिवस की आप सभी को हार्दिक शुभकामनाएं हिंदी! संस्कृत की जाई, देवनागरी लिखाई, स्वर व्यंजन वर्ण, सब से[...]
हिंदी माथे की बिंदी- जैनेन्द्र प्रसाद रविहिंदी माथे की बिंदी- जैनेन्द्र प्रसाद रवि
मनहरण घनाक्षरी छंद भाग-१सुगम हमारी हिन्दी,देश के माथे की बिंदी,हिंदी से ही भारत की, होती पहचान है। संस्कृत की बेटी[...]
शिक्षक -अजय कुमारशिक्षक -अजय कुमार
शिक्षक माताऐं देती नव जीवन, पृथ्वी देती अन्न – जल, पिता सुरक्षा करते हैं, लेकिन सच्ची मानवता, शिक्षक जीवन में[...]
शिक्षाशिक्षा
शिक्षा जीक्न मूल है, मानव धर्म सामान. शिक्षा बिन सब सुन है, वाहन सुघर सुनाम.. पाहन मे ज्यो प्राण है,[...]
शिक्षक हमारे ज्ञान पुंज-अमरनाथ त्रिवेदीशिक्षक हमारे ज्ञान पुंज-अमरनाथ त्रिवेदी
शिक्षक हमारे ज्ञान पुंज कौन कहता शिक्षकों के बिना , तकदीर हम सबकी बनेगी ? कौन कहता शान में ,[...]
सबसे खुश कौन- गिरीन्द्र मोहन झासबसे खुश कौन- गिरीन्द्र मोहन झा
सबसे खुश कौन? जिसकी अपनी दिनचर्या पर हो पूरा अधिकार, जो खुद में हो संतुष्ट, खुद में ही रमण करे,[...]
