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मनहरण घनाक्षरी- एस. के. पूनममनहरण घनाक्षरी- एस. के. पूनम

0 Comments 9:54 pm

रंगभूमि कर्मभूमि, गोदान है वरदान, निर्मला मंगलसूत्र, दिया पहचान है। ईदगाह बूढ़ीकाकी, याद है पूस की रात, लिखे मानसरोवर, पढ़ना[...]

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मनहरण घनाक्षरी- एस. के. पूनममनहरण घनाक्षरी- एस. के. पूनम

0 Comments 9:51 pm

रंगभूमि कर्मभूमि, गोदान है वरदान, निर्मला मंगलसूत्र, दिया पहचान है। ईदगाह बूढ़ीकाकी, याद है पूस की रात, लिखे मानसरोवर, पढ़ना[...]

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मनहरण घनाक्षरी- एस. के. पूनममनहरण घनाक्षरी- एस. के. पूनम

0 Comments 9:27 pm

रंगभूमि कर्मभूमि, गोदान है वरदान, निर्मला मंगलसूत्र, दिया पहचान है। ईदगाह बूढ़ीकाकी, याद है पूस की रात, लिखे मानसरोवर, पढ़ना[...]

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Devkant

दोहावली – देव कांत मिश्र ‘दिव्य’दोहावली – देव कांत मिश्र ‘दिव्य’

0 Comments 9:06 pm

रिश्ते डोरी प्रेम की, आए मन को रास। नेह सत्य सद्भावना, लाती नवल उजास।। रिश्तों को शुचिमय सघन, रखें बनाए[...]

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रूप घनाक्षरी- एस. के. पूनमरूप घनाक्षरी- एस. के. पूनम

0 Comments 10:39 pm

गर्भ से प्रथम रिश्ता, स्वीकार है माता-पिता, पदार्पण धरा पर, और खुशियाँ बटोर। आँचल में छुप कर, दुग्ध सुधा रसपान,[...]

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Pramod

मनहरण घनाक्षरी- रामपाल प्रसाद सिंहमनहरण घनाक्षरी- रामपाल प्रसाद सिंह

0 Comments 7:54 pm

आज बच्चों में उल्लास, छुट्टी मिली है जो खास, चकचक ताजिया है, भरे जो विश्वास से। हिंदुओं का गाॅंव प्यारा,[...]

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रूप घनाक्षरी- एस.के.पूनमरूप घनाक्षरी- एस.के.पूनम

0 Comments 8:53 pm

नभ पर छाए मेघ, होने लगी बूंँदा-बाँदी, तृण को पोषण मिले, हरियाली चहुँओर। भर गए नदी-नाले, तृप्त हुए जीव-जन्तु, चातक[...]

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Jainendra

रूप घनाक्षरी- जैनेन्द्र प्रसाद रविरूप घनाक्षरी- जैनेन्द्र प्रसाद रवि

0 Comments 10:02 pm

कोई यहाँ मौज करे, लाखों लूटा भोज करे, गरीबों की जिंदगी तो, काँटों के समान है। कोई तो दाने-दाने को,[...]

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हर वर्ष पेड़ लगाना है- रविन्द्र कुमारहर वर्ष पेड़ लगाना है- रविन्द्र कुमार

0 Comments 9:51 pm

प्रकृति के हैं रूप अनेक पेड़ है जिनमें से एक। ये जहाँ भी होता है, जीवन खुशियों से भर देता[...]

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Pushpa prasad

राष्ट्र निर्माता: शिक्षक – पुष्पा प्रसादराष्ट्र निर्माता: शिक्षक – पुष्पा प्रसाद

0 Comments 8:23 pm

एक शिक्षक अपनी पूरी जिंदगी बच्चों के साथ बिताते हैं। खुद सड़क की तरह एक जगह रखते है पर विद्यार्थी[...]

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