पद्यपंकज बालगीत देख कर यह दृश्य तेरा  चाय फीकी हो गई-रामपाल प्रसाद सिंह ‘अनजान’ 

देख कर यह दृश्य तेरा  चाय फीकी हो गई-रामपाल प्रसाद सिंह ‘अनजान’ 


RAMPAL SINGH ANJAN

बालपन से काल कटकर 

चाय मीठी कर गया 

हम कहाँ कितना उठे हैं 

सोचकर मन भर गया।।

नीर बहता रोक कर तो

कब हुआ कल्याण है।

बालपन पर बोझ इतना 

तन बचा बस प्राण है।।

खेलना खाना जरूरी 

शारदा पर नित्नमन।

मत बनाओ दूरियाँ अति

छोड़कर बचपन चमन।।

पाश में अभिमन्यु की जब

रुँध गई आवाज है।

सीखने के उम्र में तब

तज लिया सिर ताज है।।

हाथ हैं निर्दोष बिल्कुल

पेट पकड़ी केतली। 

दासता जिंदा चबाती

क्यों भला बचपन कली।।

है बुरी यह चाय इतनी 

हो रहे बर्बाद हम।

छोड़ ही हम क्यों न देते 

यह गुलाबी स्वाद हम।।

चाय पीना ही जरूरी 

तो भलाई काम कर।

कह उसे कर ले पढ़ाई 

खेल के सह शाम कर।।

रामपाल प्रसाद सिंह ‘अनजान’ 

सेवानिवृत शिक्षक 

मध्य विद्यालय दर्वे भदौर 

ग्राम पोस्ट थाना भदौर 

पंडारक पटना बिहार

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