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धरा का गौरव – धर्मेंद्र कुमार ठाकुर
इस धरा पर जनम लिया, ये सौभाग्य हमारा है,
जिसकी गोदी में पला-बढ़ा, हर एक जीवन प्यारा है।
पावन नदियाँ, ऊँचे पर्वत, जिसने सब कुछ हमें दिया,
कृतघ्न बन मानव ने केवल, इसका ही दोहन किया।
पापी मन को क्या समझायें, ये दुर्भाग्य तुम्हारा है,
जो अपनी ही माता का आँचल, तुमने आज उजाड़ा है।
स्वार्थ की अंधी दौड़ में तुम, सब कुछ भूलते जाते हो,
जिस माटी ने अन्न दिया, उसे ही विष पिलाते हो।
क्या-क्या दिया धरती ने, याद न हम रख पाते हैं,
शीतल पवन, सुरभित उपवन, हम पल में भूल जाते हैं।
सहती आई सब आघात, फिर भी लुटाती प्यार है,
ऐसी करुणामयी जननी का, हम पर भारी उधार है।
कई पीढ़ी ने लिया है इनसे, पावन सौभाग्य हमारा है,
ऋषि-मुनियों और वीरों का, यह पावन देश-दुआरा है।
इस अमूल्य धरोहर को, अब मिलकर हमें बचाना है,
हरियाली और खुशहाली से, इस वसुंधरा को सजाना है।
इस धरा पर जनम लिया, ये सौभाग्य हमारा है,
इसकी सेवा में समर्पित, अब यह जीवन सारा है।
चलो उठाएं एक कदम अब, तरुवर नए लगाएंगे,
सूख रही जो नदियाँ-धारा, उनको फिर चमकाएंगे।
कंक्रीट के इन जंगलों में, सांसों का अब अकाल है,
धरती माँ की रक्षा से ही, सुधरेगा यह हाल है।
संयम का हम मार्ग चुनें अब, लालच को तजना होगा,
प्रकृति के इस पावन सुर में, अपना सुर भजना होगा।
जल, थल और गगन को अपने, प्रदूषण से मुक्त करें,
जो वरदान मिला जीवन का, उसे न हम लुप्त करें।
आने वाली पीढ़ी को हम, कैसा कल दे पाएंगे?
सोचो अगर ये रूठ गई तो, हम सब कहाँ जाएंगे?
समय शेष है संभलें मानव, अब न कोई भूल करें,
काँटों भरी इस राह को तजकर, राहों में हम फूल धरें।
शीश झुकाकर माँ माटी को, बारंबार नमन हमारा है,
इसके कण-कण को सींचेंगे, यह पावन संकल्प हमारा है।
इस धरा पर जनम लिया, ये सौभाग्य हमारा है,
इसकी सेवा में समर्पित, अब यह जीवन सारा है।
धर्मेंद्र कुमार ठाकुर। प्राथमिक विद्यालय रेही टोला
रानीगंज अररिया

