दोहे – राम किशोर पाठक

Ram Kishore Pathak

दोहे

सोमेश्वर सबके सखा, सहज सुलभ संसार।
संकटमोचक सम सदा, सकट सतत संहार।।

भ्रमित भँवर भव-भय भुवन, भजन भाव भगवंत।
सरल साधना संग सह, सहज सुलभ सब संत।।

शुभद शिवाला शिव शिविर, शिष्य शिखर शिष्यत्व।
आराधित अक्सर असर, अजर-अमर अमरत्व।।

भयहारी भोले भजन, भरता भंजन भाव।
सकल सिद्धि सुख सर्वदा, समरसता सद्भाव।।

“पाठक” पाप प्रभाव पग, पुलकित प्रखर प्रमाद।
आया अनुभव आपसे, अचरज अस आह्लाद।।

     :- राम किशोर पाठक (शिक्षक/कवि)
0 Likes
Spread the love

Leave a Reply