दोहे
सोमेश्वर सबके सखा, सहज सुलभ संसार।
संकटमोचक सम सदा, सकट सतत संहार।।
भ्रमित भँवर भव-भय भुवन, भजन भाव भगवंत।
सरल साधना संग सह, सहज सुलभ सब संत।।
शुभद शिवाला शिव शिविर, शिष्य शिखर शिष्यत्व।
आराधित अक्सर असर, अजर-अमर अमरत्व।।
भयहारी भोले भजन, भरता भंजन भाव।
सकल सिद्धि सुख सर्वदा, समरसता सद्भाव।।
“पाठक” पाप प्रभाव पग, पुलकित प्रखर प्रमाद।
आया अनुभव आपसे, अचरज अस आह्लाद।।
:- राम किशोर पाठक (शिक्षक/कवि)
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