गुरु – बेबी अर्चना
आखर-आखर थी मैं बिखरी
आपने ही मुझे शब्द बनाया
मैं तो थी मृण-कण सी फैली
गढ़ आपने सुंदर घट बनाया
बन प्रकाशपुंज का आधार गुरु
पथ आलोकित सहज बनाया
अहर्निश दीपशिखा-सम जलकर
दैदीप्यमान समस्त संसार बनाया
दे संचित ज्ञान की शिक्षा गुरुवर
धरा से गगन तक विस्तार दिलाया
महक उठा मम जीवन उपवन
सदाबहार सा जो पुष्प खिलाया
दीप जलाकर अखंड ज्ञान का
अज्ञान तिमिर को दूर हटाया
राह दिखा सन्मार्ग की मुझको
आत्म-परमात्म का बोध कराया
बन पथ-प्रदर्शक व अभिभावक
हर चुनौती संग लड़ना सिखलाया
देकर स्नेह की थपकी निशदिन
व्यावहारिक-कर्तव्यनिष्ठ बनाया
सींच ज्ञान से नव-पल्लव को
वटवृक्ष सा विस्तार दिलाया
स्वार्थरहित परमार्थ भाव से
सत्-असत् का ज्ञान कराया
गुरू सम ना होता कोई सानी
जिसने जीवन का पाठ पढ़ाया
ऐसे परमपूज्य गुरु चरणन में
है मैंने बारंबार शीश नवाया
बेबी अर्चना
मध्य विद्यालय कुआड़ी
प्रखंडकुर्साकांटा
जिला अररिया

