पद्यपंकज padyapankaj,Teachers Of Bihar,ToB PadhyaPankaj गुरु : एक प्रकाश-पुंज – राघवेन्द्र झा

गुरु : एक प्रकाश-पुंज – राघवेन्द्र झा


Raghvendra Jha Raghav

गुरु : एक प्रकाश-पुंज – राघवेन्द्र झा

जब राहें हो जाती हों धुँधली
और स्वप्न दिशाहीन
तब मौन विश्वास बन
जो भीतर दीप जलाए
वही गुरु है कहलाता

वह अक्षरों के साथ
अर्थों का संसार बनाते
प्रश्नों को आकार
और जिज्ञासा को आकाश हैं देते

उनकी संगत में
केवल पाठ नहीं पढ़े जाते
आकार लेते हैं
विवेक, संवेदना और संस्कार

वे मिट्टी में छिपी
संभावना को पहचान
अनगढ़ प्रतिभा को
अपने धैर्य से तराशा करते

आज का भविष्य
जब कल की ऊँचाइयाँ छूता है
तब कहीं पीछे
गुरु का मौन श्रम गौरव से मुस्कराता है

होता गुरु वह हस्ताक्षर
जो दिखाई नहीं देता
पर शिष्य के व्यक्तित्व पर
सदा के लिए अंकित हो जाता है।

राघवेन्द्र झा
विद्यालय अध्यापक (11-12)
रा० सू ०ना०+2 उच्च विद्यालय नरपतिनगर( पण्डौल) मधुबनी

0 Likes
Spread the love

Leave a Reply