हमें करना है प्रेम।
करे जो सबका क्षेम।।
कुटिल कुत्सित सह क्रूर।
हुए सब हमसे दूर।।
नहीं प्रेमिल सहवास।
नहीं कोई है खास।।
सभी की चाहत हेम।
हमें करना है प्रेम।।०१।।
अरे मूरख आकाश।
करो मत सुख का नाश।।
यहाँ झूठा विश्वास।
रखो मत कोई आस।।
बदलना होगा नेम।
हमें करना है प्रेम।।०२।।
क्षमा को लेकर संग।
लड़ें जीवन का जंग।।
लगाकर सबको अंग।
भरें हम यहाँ उमंग।।
तभी तो होगी खेम।
हमें करना है प्रेम।।०३।।
रचनाकार:- राम किशोर पाठक
प्रधान शिक्षक
सियारामपुर, पालीगंज, पटना, बिहार।
संपर्क – ९८३५२३२९७८

