कविताएं जन्म लेती हैं –
शब्द और भाव के अर्थपूर्ण मिलावट से,
उन्मुक्त आकाश में उड़ते पक्षियों की चहचहाहट से।
कविताएं जन्म लेती हैं –
मां की ममता -दुलार हमारी संस्कृति – संस्कार से ,
मेहनत करते,कर्तव्य पथ पर खड़े पिता के डांट फटकार से।
कवितायें जन्म लेती हैं –
पेड़ की झुकती डालियों से,
खेतों में झूमती सुनहरी धान की बालियों से।
कविताएं जन्म लेती हैं-
स्त्रियों के सम्मान से ,
पुरूषों की दया ,करूणा,शील और उत्तम चरित्र निर्माण से।
कविताएं जन्म लेती हैं-
किशोरियों की उमंगों से,
सागर में उठने वाली लहरों की तरंगों से।
कविताएं जन्म लेती हैं –
प्रेम की रूख लिए हवा की सनसनाहट से,
धीरे -धीरे आ रहे प्रिय के कदमों की आहट से।
कविताएं जन्म लेती हैं-
बाल मन के आंखों में पल रहे सपनों से,
विपत्ति में सहर्ष साथ देने वाले प्यारे अपनों से।
कविताएं जन्म लेती हैं-
ममताओं संतान की दी हुई पीर से ,
परंपराओं की बलि चढ़ते राझाओं और हीर से।
कविताएं जन्म लेती हैं-
नदियों के उफान से ,
किशोरावस्था में होने वाले बदलावों के तूफान से।
कविताएं जन्म लेती हैं-
प्रकृति के कहर से ,
दो आत्माओं के मिलने वाली रात्रि के प्रथम प्रहर से।
कविताएं जन्मदिन लेती हैं –
बूढ़ी धरती की आंखों से बहती हुई पानी से,
मानव द्वारा किए जा रहे पर्यावरण के छेड़खानी से,
कविताएं जन्म लेती हैं –
पत्थर तोड़ती , पसीने बहातीं महिलाओं के संघर्ष से,
मेहनत करते लाखों किसानों के उत्कर्ष से।
कविताएं जन्म लेती हैं – राष्ट्र के गुणगान से,
सफलता की परचम लहराती बेटियों के अभिमान से।
कविताएं जन्म लेती हैं – मानवता की पहचान से,
परोपकार की भावना से जीवन जीते इंसान से।
कविताएं जन्म लेती हैं प्रकृति के प्रलयकारी रूप से,
स्वयं का जो बोध करा दे उस ज्ञान के स्वरूप से।
स्वरचित एवं मौलिक
मनु कुमारी,विशिष्ट शिक्षिका
प्राथमिक विद्यालय दीपनगर बिचारी
राघोपुर,सुपौल

