हर-पल आकर गीत सुनाता।
चुंबन लेकर ही वह जाता।।
नींद हरण कर लेता अक्सर।
क्या सखि? साजन! न सखी! मच्छर।।०१।।
छेड़-छाड़ दिन रैन करे वह।
नटखट बन बेचैन करे वह।।
रहूँ बदलती करवट बिस्तर।
क्या सखि? साजन! न सखी! मच्छर।।०२।।
अंग-अंग पर प्यार जताता।
अपना वह अधिकार बताता।।
छूने को वह रहता तत्पर।
क्या सखि? साजन! न सखी! मच्छर।।०३।।
तिमिर देखकर छुपता आता।
गाकर फिर वह गीत सुनाता।।
नोंक-झोंक फिर चले परस्पर।
क्या सखि? साजन! न सखी! मच्छर।।०४।।
छँटते ही उजियारा आता।
चूम-चूमकर है तड़पाता।।
मुश्किल होता कहना हँसकर।
क्या सखि? साजन! न सखी! मच्छर।।०५।।
रचनाकार:- राम किशोर पाठक
प्रधान शिक्षक
सियारामपुर, पालीगंज, पटना, बिहार।
संपर्क – ९८३५२३२९७९

