आपका ब्राउज़र Text-to-Speech सपोर्ट नहीं करता।
मनु के दोहे – मनु कुमारी
दुर्गा है जगतारिणी, जग उनकी संतान।
चाहो तुम उद्धार तो, कर माता का ध्यान।।
मधु कैटभ संघारिणी, खड्ग लिए मां हाथ।
शंख कमल लेकर खड़ी, चन्द्र विराजै माथ।।
सगुण व निर्गुण के परे, मैया तेरे रूप।
सुर नर मुनि जन सेवते, सहित सहस्त्रों भूप।।
महिषासुर का अंत कर, करे धर्म उत्थान।
पूरे जग में हो रहा, मैया का जयगान।।
दया क्षमा ममतामयी, नमन करूं कर जोर।
भूल चूक अब माफ कर, लखिये मेरी ओर।।
स्वरचित एवं मौलिक
मनु कुमारी, विशिष्ट शिक्षिका, प्राथमिक विद्यालय दीपनगर बिचारी, राघोपुर, सुपौल

