विषय -बगुला।
शीर्षक -आटा से बना मेरा बगुला।
आटा से बना ये बगुला,
देखने में लंबा और पतला।
दिन भर देखता रहता पानी,
खाता रहता मछली रानी।
घर इसका बरगद, पीपल पर,
लगभग रहता इसी पेड़ पर।
दो लंबी होती इनकी टाँगे,
छोटी-छोटी होती इनकी आँखें।
चोंच भी इनकी लंबी होती ,
जिससे झट मछली है पकड़ती।
पानी, दलदल में मिलता इसका खाना,
खाना खाकर हो जाता रवाना।
रंग होता इसका काला और उजला,
सुनो बच्चों इसका नाम है बगुला।
नीतू रानी, विशिष्ट शिक्षिका, स्वरचित बगुला बाल कविता।
स्कूल -म०वि० रहमत नगर सदर मुख्यालय पूर्णियाँ बिहार।
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