उत्पाती वर्षा वर्षा रानी क्रुद्ध हो, करती है उत्पात।इंद्र साथ भी दे रहे, कर भीषण वज्रपात।। बाहर खतरा है घना,[...]
गणपति वंदना – राम किशोर पाठकगणपति वंदना – राम किशोर पाठक
महामंगला छंद हे गणपति गजवदन, तुम्हें नवाऊँ शीश। देव पूज्य तुम प्रथम, कृपा करो जगदीश।। गिरिजा नंदन नमन, तुमको बारंबार।[...]
बाल प्रेरक व्यक्तित्व – राष्ट्रपिता गांधी जी एवं शास्त्री जी – अवधेश कुमारबाल प्रेरक व्यक्तित्व – राष्ट्रपिता गांधी जी एवं शास्त्री जी – अवधेश कुमार
बाल प्रेरक व्यक्तित्व : राष्ट्रपिता गाँधी जी और शास्त्री जीचरखा वाले बापू प्यारे,सत्य-अहिंसा की राह दिखाए।सादगी जिसने सिखलाई,सबको प्रेम-भाव अपनाए।[...]
देवदूत – जैनेन्द्र प्रसाद रविदेवदूत – जैनेन्द्र प्रसाद रवि
देवदूत(मनहरण घनाक्षरी छंद में)††††भाग-१देवदूत बनकर,लिया जब अवतार,वन गिरी जमीं संग, झूमा था गगन है। खुद जो गरल पीया,दूसरों के लिए[...]
रघुनंदन का है शिकार- रामपाल प्रसाद सिंह अनजानरघुनंदन का है शिकार- रामपाल प्रसाद सिंह अनजान
पद्धरी छंदसम -मात्रिक छंद, 16 मात्राएँआरंभ द्विकल से,पदांत Slअनिवार्य रघुनंदन का है शिकार। हर दिशा निशा लो गईं जाग।सबके होंठों[...]
गुरुद्वार-मैं जाऊंगी बार-बार – नीतू रानीगुरुद्वार-मैं जाऊंगी बार-बार – नीतू रानी
विषय -गुरुद्वार।शीर्षक -मैं जाउँगी बार -बार। मेरा सबकुछ है गुरुद्वार,मैं जाउंँगी बार- बार। मेरे माता-पिता गुरु हैंमेरे बंधु सखा गुरु,मेरे[...]
दशहरा -दोहावली रामकिशोर पाठकदशहरा -दोहावली रामकिशोर पाठक
दशहरा- दोहावली उस रावण को मारिए, जिसका मन पर राज। सफल तभी यह दशहरा, कह पाएँगे आज।।०१।। करते पुतला का[...]
अनुपम गाँधी-शास्त्री- राम किशोर पाठकअनुपम गाँधी-शास्त्री- राम किशोर पाठक
गाँधी शास्त्री थें भारत के लाल। जन्में दोनों सुंदर देश विशाल।। अपने कर्मो से हरपल विख्यात। धन्य हुई दोनों से[...]
आलू रे आलू तेरा रंग कैसा – नीतू रानीआलू रे आलू तेरा रंग कैसा – नीतू रानी
आलू रे आलू तेरा रंग कैसाजिस सब्जी में मिला दूँ लगे उस जैसाआलू रे आलू ———-२। आलू की चटनी बहुत[...]
बहती गंगा-सी पुण्यधार रामपाल प्रसाद सिंह ‘अनजान’बहती गंगा-सी पुण्यधार रामपाल प्रसाद सिंह ‘अनजान’
पद्धरी छंद सम-मात्रिक छंद, 16 मात्राएँ आरंभ द्विकल से, पदांत Sl अनिवार्य। मां सिद्धिदायिनी दिव्य भाल। दिखते हैं सागर[...]
