ध्यान लगा मैं कर सकूँ, रचना की बरसात। भजन करूँ नित मातु की, शरण गहूँ दिन-रात।। शब्द पुष्प के हार[...]
ठंड का प्रभाव-जैनेन्द्र प्रसाद ‘रवि’ठंड का प्रभाव-जैनेन्द्र प्रसाद ‘रवि’
तापमान गिरने से मौसम बदलने से *धीरे-धीरे ठंडक का, बढ़ता प्रभाव है।* पंछियाँ तो घोसले में- रहतीं दुबककर, *पशु छिप[...]
मैं राष्ट्र धर्म को अपनाया – राम किशोर पाठक मैं राष्ट्र धर्म को अपनाया – राम किशोर पाठक
मैं बहती बन जाऊँ सरिता मैं जीवन में लाऊँ ललिता मैं झुंड यहाँ देखूँ कितने मैं ढूँढ रहा खुद के[...]
माँ वर दो-राम किशोर पाठक माँ वर दो-राम किशोर पाठक
शीश नवाऊँ, माता के दर, माँ वर दो। रचना लाऊँ, नित्य नया कर, माँ वर दो।। शरण तुम्हारी, गहने वाले,[...]
आसरा -रामपाल प्रसाद सिंहआसरा -रामपाल प्रसाद सिंह
पद्ममाला छंद 8 वर्ण आसरा पास बैठी है। खींचती मर्म की रेखा।। जन्म लेते जिसे देखा। आज माॅं खास बैठी[...]
याद उन्हीं की आती है -रामपाल प्रसाद सिंहयाद उन्हीं की आती है -रामपाल प्रसाद सिंह
याद उन्हीं की आती है। निशि-वासर को चैन नहीं है,पीड़ा वाण चलाती है। छोड़ चले जाते हैं जग को,याद उन्हीं[...]
झलक दिखाएं कृष्ण -रामकिशोर पाठकझलक दिखाएं कृष्ण -रामकिशोर पाठक
झलक दिखाएँ कृष्ण- रोला छंद गीत मिल जाए फिर चैन, उन्हें आँखों में भरके। छलक उठे है नैन, याद मोहन[...]
रिश्ता रखें सच्चा -जैनेन्द्र प्रसादरिश्ता रखें सच्चा -जैनेन्द्र प्रसाद
प्रभाती पुष्प रिश्ता रखें सच्चा संगी-साथी मित्र सच्चे, मिलते कहांँ हैं अच्छे, संबंध जो बन जाए, रिश्ता रखें सच्चा है।[...]
आसरा पास बैठी है – रामपाल प्रसाद सिंह ‘अनजान’ आसरा पास बैठी है – रामपाल प्रसाद सिंह ‘अनजान’
खींचती मर्म की रेखा।। जन्म लेते जिसे देखा। आज माॅं खास बैठी है। आसरा पास बैठी है।। दर्द होने[...]
चिंता है रहती -रामकिशोर पाठकचिंता है रहती -रामकिशोर पाठक
चिंता है रहती- महा-शशिवदना छंद गीत दुख की सब गाथा, औरों से कहती। धन दौलत की, चिंता है रहती।। राम[...]
