हाँ मैं बिहार हूँ पर्यटनों का भरमार हूँ ,
इतिहासों की पुकार हूँ धर्मों का प्रयाग हूँ ।
माता सीता की अवतरण का गवाह हूँ ,
जारसंध की विशाल मगध का मैं ही प्रमाण हूँ ।
चलो सभी मिल कर करें बिहार पर्यटन का काम,
पधारो गया जी धाम यहाँ पद चिन्ह हैं हरी के नाम
जिस नदी को दिया जानकी ने उसकी पहचान,
उसी फाल्गु नदी तट पर होता है प्रसिद्ध पिंडदान
बेतिया बाघ अभ्यारण,काकोलत का जल प्रपात ,
ठंडक देता भीखनाठोढी यहाँ की प्रकृति हैं पर्याप्त
लीची,आम और मखाना होते हैं विदेशों में निर्यात,
यहाँ की रमणीय स्थल को कोई न दे सकेगा मात
देखो तुम शेरशाह का मकबरा, मनेर की दरगाह,
सासाराम की पहाड़ी देख बच जाएगी न कोई चाह
बुद्ध से उपजा बोधि वृक्ष सिखाती है हमें नयी राह,
घूमो ज्ञान का खंडहर नालंदा जिसे दिया था ढाह
गंगा घाट, तारामंडल, चिड़ियाघर भी कभी जाओ,
चलो ज्ञान की खान दिमाग में तुम भी अब बनाओ
राजगीर ग्लास ब्रिज, जंगल सफारी करने आओ
यहाँ का प्रसिद्ध सिलाओ खाजा सबको खिलाओ
हाँ मैं बिहार हूँ पर्यटनों का भरमार हूँ ,
इतिहासों की पुकार हूँ धर्मों का प्रयाग हूँ ।
माता सीता की अवतरण का गवाह हूँ ,
जारसंध की विशाल मगध का मैं ही प्रमाण हूँ ।
हाँ मैं पर्यटन – ए – बिहार हूँ ।।
शिक्षक – रवि कुमार
विद्यालय – कन्या उo मo विo, मसाढ़ ( उदवंतनगर, भोजपुर )

