जल ही जीवन विचार लाओ।
अपनी धरती निहार आओ।।
प्यासे कब-तक भला सहेंगे।
दिन कितने हम बचे रहेंगे।।
धरा-ताप जब हमें जलाए।
प्राण हमारे यही बचाए।।
कहते ईश्वर जल बरसाओ।
जल ही जीवन विचार लाओ।।०१।।
खाना पीना अरे नहाना।
तरुवर होगा हमें लगाना।।
बिना नीर के नही गुजारा।
पग-पग पर दे यही सहारा।।
हो दूषित तो इसे बचाओ।
जल ही जीवन विचार लाओ।।०२।।
जीवन रक्षक यही बनेगा।
इसे त्याग कर नहीं बचेगा।।
इसकी रक्षा अगर करोगे।
तभी सुरक्षित स्वयं रहोगे।।
अधिकाधिक बस विटप लगाओ।
जल ही जीवन विचार लाओ।।०३।।
गीतकार:- राम किशोर पाठक
जल ही जीवन है- वानवासिका छंद गीत
पदांत- गुरु गुरु
९वीं और १२वीं लघु अनिवार्य
जल ही जीवन विचार लाओ।
अपनी धरती निहार आओ।।
प्यासे कब-तक भला सहेंगे।
दिन कितने हम बचे रहेंगे।।
धरा-ताप जब हमें जलाए।
प्राण हमारे यही बचाए।।
कहते ईश्वर जल बरसाओ।
जल ही जीवन विचार लाओ।।०१।।
खाना पीना अरे नहाना।
तरुवर होगा हमें लगाना।।
बिना नीर के नही गुजारा।
पग-पग पर दे यही सहारा।।
हो दूषित तो इसे बचाओ।
जल ही जीवन विचार लाओ।।०२।।
जीवन रक्षक यही बनेगा।
इसे त्याग कर नहीं बचेगा।।
इसकी रक्षा अगर करोगे।
तभी सुरक्षित स्वयं रहोगे।।
अधिकाधिक बस विटप लगाओ।
जल ही जीवन विचार लाओ।।०३।।
गीतकार:- राम किशोर पाठक
प्रधान शिक्षक
सियारामपुर, पालीगंज, पटना, बिहार।
संपर्क – ९८३५२३२९७८
प्रधान शिक्षक
सियारामपुर, पालीगंज, पटना, बिहार।
संपर्क – ९८३५२३२९७८

