प्रेम का पर्याय – श्री कृष्णा – रंजना कुमारी
गोपियों के बीच प्रेमी,
ग्वालों के बीच सखा,
यशोदा के आँगन में नटखट,
माखन चुराता कान्हा।
कंस के सम्मुख योद्धा बनकर,
धर्म की राह दिखाते हैं,
द्वारका के राजा होकर भी,
सुदामा को गले लगाते हैं।
महल और झोपड़ी के बीच,
जब दूरी बहुत बड़ी थी,
दोस्ती के उस दरवाज़े पर,
हर हैसियत छोटी थी।
द्रौपदी के विश्वास में भी,
कृष्ण ही बनकर आए,
संकट की उस घड़ी में
सम्मान के लिए खड़े हो जाएँ।
राधा संग उनका प्रेम कहें तो,
शायद प्रेम छोटा पड़ जाए,
अधिकार जहाँ मिट जाता है,
वहीं समर्पण जन्म ले जाए।
अर्जुन के सारथी बनकर,
कर्म का पाठ पढ़ाया,
“कर्म करो, फल की चिंता मत”—
जीवन का सत्य बताया।
अहंकार नहीं, बस प्रेम रखो,
अधिकार नहीं, विश्वास रखो,
परिस्थिति चाहे बदल जाए,
अपने धर्म को पहचान रखो।
कृष्ण कहीं केवल मंदिर में नहीं,
वो हर सच्चे रिश्ते में हैं,
प्रेम में, मित्रता में, त्याग में,
और हमारे संघर्षों में हैं।
अहंकार से प्रेम चुनो,
अधिकार से त्याग चुनो,
आसक्ति छोड़ सहज बनो—
यही कृष्ण का संदेश सुनो।
रंजना कुमारी
जय श्री कृष्णा
राधे राधे
JUHS खम्हार विभूतिपुर समस्तीपुर

