रोला – रामपाल प्रसाद सिंह ‘अनजान’
जहाँ होती गुरुवाई
लिए रात अवतार, कृष्ण गुरुद्वार खड़े हैं।
बोल रहे प्रभु आप, चरण गुरु और बड़े हैं।।
सदियों का संस्कार, आज बरगद बन फैला।
लगा प्राच्य दस्तूर, कभी होए ना मैला।।
सदा सत्य यह बात, बिना गुरु ज्ञान न होता।
गुरु सागर आगाध, प्रभो भी मारें गोता।।
मिली बड़ी सौगात, देवगण लेकर आए।
गुरु महिमा आधार, शक्तिशाली कर पाए।।
बढ़िया सकल समाज, स्वर्ग बन जाए धरती।
कृपा प्राप्त गुरुदेव, कृपा तज रहते परती।।
कहते कवि”अनजान”, परस्पर सीख-सिखाई।
वह है देश महान, जहाँ होती गुरुवाई।।
रामपाल प्रसाद सिंह ‘अनजान’
सेवानिवृत शिक्षक
मध्य विद्यालय दरवेभदौर
पंडारक पटना बिहार

