पद्यपंकज sandeshparak,Shakshanik  तारे-रत्ना प्रिया

 तारे-रत्ना प्रिया


Ratna Priya

आसमां में कितने तारे ,

तारे कितने सारे ,

टिमटिमाकर हमें जगाते ,

जुग्नू लगते प्यारे ।

सप्तऋषियों का समूह है ,

दिव्य अलौकिक तारा ,

यशस्वी बन चमक रहा है ,

नभ में यह ध्रुवतारा ।

तारे , ग्रह और उपग्रह हैं ,

नीले नभ के सैनिक ,

सदा समय पर हैं चमकते ,  

क्रम न टूटता दैनिक ।

चंदा मामा आसमां में ,

आँखमिचौली खेलें ,

नित परियाँ घूमने आतीं ,

तारों के ये मेले।

ये तारे बारात लेकर ,

धरती पर भी आएँ ,

बच्चों को झूला झुलाकर ,

मीठी नींद सुलाएँ ।

सूरज दादा को देखकर ,

लुप्त हो गए तारे ,

रात भर तो की है मस्ती ,

नटखट हैं ये सारे ।

 रत्ना प्रिया

शिक्षिका (11 – 12 हिन्दी )

उच्च माध्यमिक विद्यालय माधोपुर,

चंडी ,नालंदा

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