अब उषा की, बात करनी है- रतिरूप मात्रिक छंद गीत २५ मात्रा – राम किशोर पाठक
अनुराग मन में, प्रीति जन में, नित्य भरनी है।
छोड़ो निशा की, अब उषा की, बात करनी है।।
पाथेय पथ पर, दीप बनकर, नैन ज्योतिष हैं।
रखते हृदय में, बोध भय में, सर्व किल्विष हैं।।
सबको समझना, क्यों उलझना, पीर हरनी है।
छोड़ो निशा की, अब उषा की, बात करनी है।।०१।।
है आत्म केन्द्रित, स्वार्थ प्रेरित, भाव सबका ही।
है दोष देना, रोष लेना, चाव सबका ही।।
नि: स्वार्थ हो ले, आप तोले, घात टरनी है।
छोड़ो निशा की, अब उषा की, बात करनी है।।०२।।
भव में भटकना, नित खटकना, जीव का गम है।
हरि नाम जपना, कर्म करना, मार्ग उत्तम है।।
प्रारब्ध सह ले, सत्य गह ले, रात क्षरनी है।
छोड़ो निशा की, अब उषा की, बात करनी है।।०३।।
गीतकार:- राम किशोर पाठक
प्रधान शिक्षक
सियारामपुर, पालीगंज, पटना, बिहार।
संपर्क- ९८३५२३२९७८

