पद्यपंकज padyapankaj,Teachers Of Bihar,ToB PadhyaPankaj,अनुभव,काव्य लेखन भारत की अमर धरोहर – धर्मेंद्र कुमार ठाकुर

भारत की अमर धरोहर – धर्मेंद्र कुमार ठाकुर


Dharmendra Kumar Thakur

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भारत की अमर धरोहर – धर्मेंद्र कुमार ठाकुर

विविध रूप और रंग हैं, एक कहानी मान।
पावन भारत भूमि की, संस्कृति सदियों जान॥
गंगा-जमुना की लहर, बरसे अविरल प्यार।
विविधता में एकता, इस माटी का सार॥
गूँजे आरती-अज़ान यहाँ, मजहब का सम्मान।
भिन्न-भिन्न भाषाएँ पर, भाव एक समान ॥
होली, दीवाली, ईद संग, क्रिसमस की है धूप।
इस गुलशन में खिल रहे, सुंदर फूल अनूप॥
वेश-सहन हैं भिन्न पर, रग-रग में विश्वास।
मिलकर सब एक ही रहें, यही हृदय की प्यास॥
अतिथि देवो भव: यहाँ, मानवता है धर्म।
विश्व बंधुत्व संदेश ही, संस्कृति का है मर्म॥
वसुधैव कुटुम्बकम् बसा, कण-कण के हर भाग।
सत्य, अहिंसा और दया, का जागे अनुराग॥
ज्ञान पुरातन देश का, जग में है अनमोल।
इस पावन भू-भाग का, कोई सके न तोल॥
बदले दौर भले मगर, साख बचाएँगे आज।
संस्कृति के इस दीप से, चमकेगा समाज॥
हाथ मिलाकर पग बढ़ें, रचें नया इतिहास।
एकता के इस गान से, फैले नव प्रकाश॥

धर्मेंद्र कुमार ठाकुर। प्राथमिक विद्यालय रेही टोला
रानीगंज अररिया

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