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अकारण दर्दों को झेला – कार्तिक कुमार
एक भावपूर्ण कविता
अकारण दर्दों को झेला,
फिर भी चेहरे पर मुस्कान रखी।
टूटकर बिखरते रहे भीतर,
बाहर खुशियों की पहचान रखी।
किसी ने समझा नहीं मन को,
किसी ने हालात नहीं जाना।
आँखों में आँसू छिपाकर,
होंठों पर हँसी का अफसाना।
बिना गलती सजा मिली,
बिना अपराध इल्जाम सहा।
जिसे अपना समझा जीवन में,
उसी से सबसे अधिक दर्द सहा।
खामोशी मेरी कमजोरी नहीं,
यह मेरे धैर्य की निशानी है।
हर दर्द को सीने में रखकर,
जीना मेरी एक कहानी है।
अब आँधियों से डरना क्या,
जब तूफानों में पलना सीखा।
अकारण दर्दों को झेलकर,
खुद को मजबूत बनाना सीखा।
समय कभी तो न्याय करेगा,
सच्चाई फिर मुस्काएगी।
आज भले ही पीड़ा है मन में,
कल खुशियों की सुबह आएगी।
प्रस्तुति: कार्तिक कुमार
मध्य विद्यालय कटरमाला, गोरौल, वैशाली
7004318131

