सुभाष चंद्र बोस को, देश के उस जोश को, जनता मदहोश को, फिर से जगाइए। पास और पड़ोस को, देश[...]
Category: छंद
मनहरण घनाक्षरी- रामकिशोर पाठकमनहरण घनाक्षरी- रामकिशोर पाठक
पाठशाला के द्वार को, बच्चों में सुविचार को, खोलने को आप नित, समय से आइए। परिसर साफ करे, सब हाथों[...]
दोहावली- रामकिशोर पाठकदोहावली- रामकिशोर पाठक
है महाकुंभ स्नान का, वेदों में गुणगान। अमृत स्नान बेला सुखद,करे तेज प्रदान।। त्रिवेणी जल प्रयाग का, मन से करिए[...]
दोहावली – रामकिशोर पाठकदोहावली – रामकिशोर पाठक
मने हमारे देश में, नित्य नये त्योहार। मकर रवि का प्रवेश जब,खुशियाँ तभी अपार।। बाँट रहे खुशियाँ सभी, मिलजुल कर[...]
मनहरण घनाक्षरी- जैनेन्द्र प्रसाद ‘रवि’मनहरण घनाक्षरी- जैनेन्द्र प्रसाद ‘रवि’
टहनियों पत्तियों से ओस है टपक रही, कुहासे से पटा हुआ, खेत-वन-बाग हैं। तन को गलाता तेज पछुआ पवन बहे,[...]
मनहरण घनाक्षरी – भावानंद सिंहमनहरण घनाक्षरी – भावानंद सिंह
बीत गया जो समय, वह पुराना साल था, मिलकर हों स्वागत, आया नववर्ष है। चारों ओर खुशी छायी, ढोल-नगाड़े संग[...]
दोहावली- रामकिशोर पाठकदोहावली- रामकिशोर पाठक
तन-मन-धन अर्पित करे, रखकर स्वच्छ विचार। पाठक नित करते रहे, जन-जन का उपकार।। वाणी ऐसी बोलिए, करें नहीं हलकान।[...]
मनहरण घनाक्षरी- जैनेन्द्र प्रसाद ‘रवि’मनहरण घनाक्षरी- जैनेन्द्र प्रसाद ‘रवि’
घटाएँ गरजती हैं, बिजली चमकती हैं, सारा जग दिखता है, दूधिया प्रकाश में। रात में अंधेरा होता, बादलों का डेरा[...]
मनहरण घनाक्षरी- देवकांत मिश्र ‘दिव्य’मनहरण घनाक्षरी- देवकांत मिश्र ‘दिव्य’
निपुण का भाव भर, पहुँच प्रदान कर, बुनियादी ज्ञान से ही, बच्चों को जगाइए। संख्या की समझ लाएँ, प्रतिपुष्टि गुण[...]
मनहरण घनाक्षरी- जैनेन्द्र प्रसाद ‘रवि’मनहरण घनाक्षरी- जैनेन्द्र प्रसाद ‘रवि’
विद्यार्थी जो जीवन में करते न मेहनत, सदा पग-पग पर, भोगें खामियाजा हैं। दुनिया में कई लोग कर्ज में हैं[...]
