अनुपयोगी का साथ, हानिकारक का हाथ, प्रदूषण कहलाता, बिगड़ जाता है काज। भूमि जल वायु संग, ध्वनि प्रकाश का ढंग,[...]
Category: छंद
देव घनाक्षरी- रामकिशोर पाठकदेव घनाक्षरी- रामकिशोर पाठक
विज्ञान की बात करें, न्यूटन के साथ करें, जिन्होंने है सिखलाया, नियम ऊर्जा संरक्षण। पृथक निकाय को लें, समय स्थान[...]
हाथ बढ़ा प्रभु मंगल दीजै – कुमकुम कुमारी ‘काव्याकृति’हाथ बढ़ा प्रभु मंगल दीजै – कुमकुम कुमारी ‘काव्याकृति’
है अति बेकल नैन हमारे। दर्शन को प्रभु राम तुम्हारे।। देकर दर्शन काज सँवारें। नाथ हमें भव से अब तारें।।[...]
वेदमाता भवानी – कुमकुम कुमारी ‘काव्याकृति’वेदमाता भवानी – कुमकुम कुमारी ‘काव्याकृति’
करूँगी सदा वंदना मैं तुम्हारी, भवानी सुनो प्रार्थना है हमारी। बना दो विवेकी हरो अंधियारा, पुत्री हूँ तुम्हारी बनो माँ[...]
वीणा की झंकार – रत्ना प्रियावीणा की झंकार – रत्ना प्रिया
प्रकृति के मनोहर आँगन में, वसंत की बहार है, वागेश्वरी के वीणा की, गूँजती झंकार है। श्वेत पद्म व श्वेत[...]
मनहरण घनाक्षरी- रामकिशोर पाठकमनहरण घनाक्षरी- रामकिशोर पाठक
वीणा रखती हाथ में, सुर संगीत साथ में, जीवन में आनंद हो, भाव रस पीजिए। मॉं तेरी हंस सवारी, लगती[...]
मनहरण घनाक्षरी- रामकिशोर पाठकमनहरण घनाक्षरी- रामकिशोर पाठक
अंडाकार पथ पर, ग्रह लगाते चक्कर, सूर्य रहता केन्द्र में, परिक्रमा मानिए। सूर्य की पृथ्वी चंद्रमा, करे सदा परिक्रमा, तीनों[...]
मनहरण घनाक्षरी- रामकिशोर पाठकमनहरण घनाक्षरी- रामकिशोर पाठक
वीणा रखती हाथ में, सुर संगीत साथ में, जीवन में आनंद हो, भाव रस पीजिए। मॉं तेरी हंस सवारी, लगती[...]
दोहावली- मनु कुमारीदोहावली- मनु कुमारी
अमर रहे गणतंत्र यों, जैसे सूरज चान। जन-जन का सम्मान ये, सबका है अभिमान।। संविधान से है मिला, जीने का[...]
दोहावली- रामकिशोर पाठकदोहावली- रामकिशोर पाठक
निर्णायक जन-जन जहॉं, सफल वहीं गणतंत्र। समता जिसके मूल में, भागीदारी मंत्र।। छब्बीस जनवरी शुभद, दिवस हुआ गणतंत्र। संविधान लागू[...]
