Category: दिवस

Devkant

योग सौम्य संजीवनी – दोहावली – देवकांत मिश्र ‘दिव्य’योग सौम्य संजीवनी – दोहावली – देवकांत मिश्र ‘दिव्य’

0 Comments 5:44 am

दोहावली योग सौम्य संजीवनी “””'””””””””””””””””””””””””””””””””””””””””””””” योग गणित का अंश है, यही खोज पहचान।। दिव्य मिलन परमात्म का, सुंदर शुभ अवदान।।०१[...]

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करें योग रहें नीरोग – मृत्युंजय कुमारकरें योग रहें नीरोग – मृत्युंजय कुमार

0 Comments 5:42 am

करें योग-रहे नीरोग आओ हम सब योग करें। जीवन को नीरोग करें।। सुबह सवेरे उठकर जो करते हैं योग। बिमारी[...]

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Girindra Mohan Jha

योग – गिरींद्र मोहन झायोग – गिरींद्र मोहन झा

0 Comments 5:36 am

योग योग का अर्थ है जुड़ना, एकाग्रता, निरन्तर अभ्यास। कर्म-कुशलता, समत्व, दुःखसंयोग-वियोग का प्रयास।। भक्तियोग, ज्ञानयोग, राजयोग, कर्मयोग इनके चार[...]

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योग जरूरी है – बिंदु अग्रवालयोग जरूरी है – बिंदु अग्रवाल

0 Comments 5:30 am

योग जरूरी है हाँ ! योग जरूरी है। तन-मन और मस्तिष्क को, स्वस्थ रखने के लिए। शारीरिक विकास के लिए।[...]

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Devkant

पिता व्योम के तुल्य हैं – विधा दोहा – देवकांत मिश्र ‘दिव्य’पिता व्योम के तुल्य हैं – विधा दोहा – देवकांत मिश्र ‘दिव्य’

0 Comments 10:32 pm

विधा – दोहा पिता व्योम के तुल्य हैं “”””””””””””””””””””””””””””””””””””””””””””” पिता व्योम के तुल्य हैं, पिता सृष्टि विस्तार। जीवन दाता हैं[...]

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Girindra Mohan Jha

पिता – गिरींद्र मोहन झापिता – गिरींद्र मोहन झा

0 Comments 10:28 pm

पिता परमपिता परमेश्वर हैं, हम सब उनकी संतान, उन्हीं की अनुकम्पा से, हम सब सदा क्रियमाण । सबसे पहले परमपिता[...]

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